BSSC परिचारी परीक्षा में 75% अभ्यर्थी रहे लापता, जानें इसकी बड़ी वजह!
कई परीक्षार्थियों ने सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले ही व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। जिनमें प्रवेश समय की सख्ती, दूर-दराज के केंद्र और जानकारी के अभाव जैसी समस्याएं शामिल थीं...
बिहारशरीफ/शेखपुरा (नालंदा दर्पण)। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) द्वारा रविवार को आयोजित कार्यालय परिचारी परीक्षा में एक चौंकाने वाला ट्रेंड देखने को मिला। नालंदा और शेखपुरा जिलों में परीक्षार्थियों की भारी संख्या में अनुपस्थिति ने न केवल प्रशासन बल्कि शिक्षा विशेषज्ञों को भी हैरानी में डाल दिया है।
नालंदा जिले में निर्धारित कुल 11,948 अभ्यर्थियों में से केवल 2971 परीक्षार्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। जबकि करीब 8977 अभ्यर्थी परीक्षा से नदारद रहे। इसी तरह शेखपुरा जिले में भी 3552 अभ्यर्थियों में से सिर्फ 878 ही परीक्षा देने पहुंचे। शेष 2674 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षार्थियों की अनुपस्थिति की सबसे बड़ी वजह कठोर निगरानी और कदाचार मुक्त परीक्षा व्यवस्था रही। परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच, मोबाइल फोन पर प्रतिबंध और प्रवेश का समय सीमित (सुबह 11 बजे तक) होने की वजह से कई उम्मीदवार परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बावजूद प्रवेश से वंचित हो गए।
इसके साथ ही बीते वर्षों में कई बार BSSC परीक्षाओं में पेपर लीक और कदाचार की घटनाएं देखने को मिली थीं। जिससे इस बार आयोग ने बेहद सख्त रवैया अपनाया। हर परीक्षा केंद्र पर वीक्षकों, स्टैटिक दंडाधिकारियों, पुलिस बल और उड़नदस्ते की तैनाती की गई थी। नालंदा जिले में कुल 15 परीक्षा केंद्रों पर 31 स्टैटिक दंडाधिकारी, 7 जोनल एवं 4 उड़नदस्ता अधिकारी नियुक्त किए गए थे।
शेखपुरा में डीएम आरिफ अहसन और एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने खुद परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया और हर अभ्यर्थी की व्यक्तिगत तलाशी ली गई। परीक्षा के दौरान धारा 144 (निषेधाज्ञा) भी लागू की गई थी।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अभ्यर्थियों की इस स्तर की अनुपस्थिति एक चिंताजनक संकेत है। एक तरफ जहाँ परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों का भरोसा तंत्र से डगमगाता दिख रहा है। कई परीक्षार्थियों ने सोशल मीडिया पर परीक्षा से पहले ही व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। जिनमें प्रवेश समय की सख्ती, दूर-दराज के केंद्र और जानकारी के अभाव जैसी समस्याएं शामिल थीं।





