सिलाव अंचल कार्यालय में जिंदा को मुर्दा बनाकर जमीन हड़पने का खेल

राजगीर (नालंदा दर्पण)। सिलाव अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक ऐसा गोरखधंधा सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां ‘पैसे लाओ, दाखिल-खारिज कराओ’ का धंधा जोर-शोर से चल रहा है। जिंदा लोगों को कागजों में मुर्दा और मृतकों को जिंदा दिखाने का खेल इस कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आम बात बन चुकी है। ऐसा ही एक सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सिलाव नगर पंचायत के वार्ड नंबर-4 सिलाव डीह से सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
सिलाव डीह निवासी विभूति महतो पिता स्व. गुरुप्रसाद महतो, जो अभी जीवित हैं, इस घोटाले के शिकार बने हैं। उनके दो पुत्र हैं- बड़ा पुत्र स्व. अरविंद कुमार, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और छोटा पुत्र जयप्रकाश कुमार। स्व. अरविंद कुमार के बेटे राजीव रंजन ने अपने जीवित दादा विभूति महतो का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर सिलाव अंचल कार्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी सारी जमीन अपने नाम करा ली।
जब इस फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच सिलाव नगर पंचायत कार्यालय में की गई तो वहां से साफ तौर पर बताया गया कि उनके कार्यालय से ऐसा कोई मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। यह खुलासा होने पर विभूति महतो ने मामले की छानबीन शुरू की, तब उन्हें पता चला कि उनकी जमीन का दाखिल-खारिज पहले ही कर दिया गया है। इस दाखिल-खारिज का वाद संख्या- 1956/2024,2025 दर्ज है।
जब इस मामले में सिलाव अंचलाधिकारी आकाश दीप से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा, ‘मैं उस समय छुट्टी पर था। मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। मेरी अनुपस्थिति में राजस्व पदाधिकारी प्रीति कुमारी चार्ज में थीं और उनके द्वारा यह दाखिल-खारिज किया गया है’।
वहीं जब राजस्व पदाधिकारी प्रीति कुमारी से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा, ‘नगर पंचायत मेरे क्षेत्राधिकार से बाहर है। मेरे द्वारा कोई दाखिल-खारिज नहीं किया गया है’।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस फर्जीवाड़े का जिम्मेदार कौन है? सिलाव अंचल कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की आपसी तालमेल और जवाबदेही की कमी ने इस तरह के भ्रष्टाचार को और बढ़ावा दिया है।
सिलाव अंचल कार्यालय में यह कोई इकलौता मामला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहां पैसे के बल पर कोई भी गैरकानूनी काम कराया जा सकता है। फर्जी दस्तावेज तैयार करना, जिंदा लोगों के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाना और जमीन के दाखिल-खारिज में हेराफेरी जैसे मामले यहां आम हो चुके हैं।
विभूति महतो इस घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं। अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी गई जमीन को फर्जी तरीके से हड़पे जाने के बाद वे इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की गहन जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लेकिन अंचल कार्यालय के अधिकारियों की लापरवाही और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति ने उनके लिए न्याय की राह को और मुश्किल बना दिया है।
इस मामले ने न केवल सिलाव अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि नालंदा जिला प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना यह है कि इस सनसनीखेज मामले में जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। क्या विभूति महतो को उनकी जमीन वापस मिल पाएगी? और क्या इस फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी?
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