
नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। नगरनौसा प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत लोदीपुर गांव के वार्ड संख्या-6 में सड़क निर्माण की प्रक्रिया ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। करीब एक माह पहले गांव की मुख्य गली को जेसीबी से खोद दिया गया, लेकिन इसके बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा। अब बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और जलजमाव के कारण लोगों का पैदल चलना और दोपहिया वाहनों से गुजरना तक मुश्किल हो गया है।
बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए खुदाई के बाद यदि काम तत्काल शुरू नहीं होना था तो सार्वजनिक रास्ते को इस तरह क्यों खोदा गया।
जियो टैगिंग अब हुई तो खुदाई पहले कैसे?
मामले में सबसे बड़ा सवाल नगरनौसा बीडीओ ओमप्रकाश कुमार के बयान के बाद सामने आया है। बीडीओ के अनुसार सड़क योजना का जियो टैग मंगलवार को किया गया है और अगले एक-दो दिनों में निर्माण शुरू हो जाएगा।
ऐसे में सवाल है कि यदि जियो टैगिंग मंगलवार को हुई, तो करीब एक महीने पहले जेसीबी से सड़क की खुदाई किस प्रक्रिया के तहत कराई गई? क्या उस समय योजना को प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरी मिल चुकी थी? क्या कार्यादेश जारी हुआ था? यदि हां, तो निर्माण शुरू होने में इतना लंबा अंतर क्यों रहा? यही बिंदु अब पूरे मामले की प्रशासनिक जांच का आधार बन सकता है।
शिकायत पर मौके पर पहुंचीं सीओ
ग्रामीणों की शिकायत के बाद नगरनौसा अंचलाधिकारी नेहा कुमारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने समस्या के शीघ्र समाधान के लिए बीडीओ से संपर्क करने की बात कही। इसके बाद पंचायत सेवक को भेजकर रिपोर्ट मंगाने की बात सामने आई। अब ग्रामीणों की नजर बीडीओ के आश्वासन पर है कि सड़क निर्माण एक-दो दिनों में शुरू होगा।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
ग्रामीणों ने रामपुर पंचायत के मुखिया और संबंधित वार्ड सदस्य की भूमिका की जांच की मांग की है। पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और लूट-खसोंट को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब मामले में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि सड़क की खुदाई किसके निर्देश पर हुई, उस समय योजना की स्थिति क्या थी और निर्माण कार्य शुरू करने में देरी की वजह क्या रही।
‘कास्ट-कैश’ के आरोप, जांच की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत की योजनाओं में कथित अनियमितताओं और ‘कास्ट-कैश’ जैसी व्यवस्था के आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार शिकायत नालंदा जिलाधिकारी के अलावा पंचायती राज विभाग और मुख्यमंत्री स्तर तक की गई है। मांग है कि पंचायत की योजनाओं की स्वीकृति, जियो टैगिंग, कार्यादेश, निर्माण, मापी और भुगतान तक की प्रक्रिया की जांच हो।
सड़क से बड़ा सवाल जवाबदेही का
लोदीपुर की अधखुदी सड़क का मामला सिर्फ निर्माण में देरी तक सीमित नहीं है। यह सवाल उठाता है कि सरकारी विकास योजनाओं में योजना और जमीन पर काम के बीच तालमेल कितना है।
यदि योजना स्वीकृत थी तो निर्माण समय पर क्यों नहीं शुरू हुआ और यदि प्रक्रिया अधूरी थी तो मुख्य सार्वजनिक रास्ते को पहले ही क्यों खोद दिया गया। इन सवालों का जवाब दस्तावेजों के आधार पर सामने आना चाहिए।
बीडीओ के मुताबिक अब निर्माण जल्द शुरू होना है। ऐसे में ग्रामीणों को सड़क बनने का इंतजार है, लेकिन उससे कम महत्वपूर्ण यह सवाल नहीं कि एक माह तक उन्हें अधखुदे रास्ते की परेशानी आखिर किसकी लापरवाही के कारण झेलनी पड़ी।






