नालंदा निवासी हैं धीरेंद्र शास्त्री उर्फ़ बागेश्वर बाबा का गुरु, 35 साल बाद खुला राज़

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के नालंदा जिले का सिलाव प्रखंड इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाली घटना की वजह से चर्चा में है। यहां के पहेतिया गांव के निवासी रामलाल दास के पुत्र सोहराय मिस्त्री ने दावा किया है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ़ बागेश्वर बाबा के गुरु उनके पिता हैं, जो 35 साल पहले रहस्यमय ढंग से गांव छोड़कर कहीं चले गए थे। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कुछ प्रमाण भी पेश किए हैं, जिनमें उनका बैंक खाता प्रमुख है।

परिवार का दावा- टीवी पर पहचान, बैंक खाता और कई सबूतः 3 मार्च 2024 की शाम का दिन उनके परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। सोहराय मिस्त्री के परिवार के सदस्य घर में बैठकर एक भक्ति कार्यक्रम देख रहे थे, जब उनकी बहू शारदा देवी ने टीवी पर धीरेंद्र शास्त्री के गुरु को देखा और पहचान लिया। उन्होंने तुरंत अपने पति और बेटे को बुलाया और तस्वीरें दिखाईं। सबने मिलकर उनकी पहचान की पुष्टि की।

सोहराय मिस्त्री का कहना है कि उनके पिता का नाम रामलाल दास है, जो सिलाव इलाहाबाद बैंक में खाता खुलवाए थे। वे पहले राजगीर के विश्वकर्मा मंदिर परिसर में साधु का काम करते थे और गांव में साधु बाबा के नाम से भी जाने जाते थे। उनके पास अपने पिता से जुड़े कई प्रमाण हैं, जिनमें बैंक खाता सबसे पुख्ता सबूत के रूप में सामने आया है।

35 वर्षों का इंतजार और बढ़ती उम्मीदः रामलाल दास 30 से 35 साल पहले अचानक गांव छोड़कर चले गए थे, तब से परिवार उनका कोई पता नहीं लगा पाया था। हालांकि, अब टीवी पर उन्हें देखने के बाद परिवार को उम्मीद जगी है कि वे जल्द ही उनसे मुलाकात कर पाएंगे। परिवार ने बागेश्वर बाबा के आश्रम में चार दिन बिताए, लेकिन अभी तक उनके पिता से मुलाकात नहीं हो पाई है।

सोहराय मिस्त्री के परिवार में कुल 25 लोग हैं, जिनमें उनके चार बच्चें  सुजीत, अजित, रंजू देवी और संगीता देवी भी शामिल हैं। परिवार बढ़ई का काम करता है और गांव में उनकी अपनी दुकान है।

बागेश्वर बाबा का बिहार प्रेमः इस बीच पंडित धीरेंद्र शास्त्री उर्फ़ बागेश्वर बाबा वर्तमान में गया के दौरे पर हैं। यहां उन्होंने अपने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें बिहार और गया जी से बेहद लगाव है।

उन्होंने बताया कि वे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक में बिहार और गया जी की चर्चा करते हैं। बाबा के गया आने की जानकारी अभी इस परिवार को नहीं मिली है, लेकिन वे आशा कर रहे हैं कि जल्द ही उनके पिता से मिल सकेंगे।

क्या परिवार पुनर्मिलन का सपना पूरा कर पाएगा? इस घटना ने इलाके में उत्सुकता और आश्चर्य का माहौल पैदा कर दिया है। गांव के लोग और परिवार के सदस्य बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस कहानी का सुखद अंत होगा और क्या 35 साल से बिछड़ा परिवार फिर से एक हो पाएगा।

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नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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