निजी स्कूलों पर बिहार शिक्षा विभाग सख्त, दिया एक माह का अल्टीमेटम

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार शिक्षा विभाग ने राज्य में सरकारी योजनाओं का सही ढंग से लाभ वितरण सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया हैं।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक योगेंद्र सिंह ने सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एक माह के भीतर अपने-अपने जिलों के निजी स्कूलों का अनिवार्य रूप से ई-संबंधन पोर्टल पर निबंधन कराएं।

उन्होंने इसके लिए जिले स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने का भी सुझाव दिया गया हैं। ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

सरकारी लाभ के लिए दोहरे नामांकन पर सख्तीः यह निर्णय उन मामलों के कारण लिया गया हैं, जहां कई विद्यार्थी सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में नामांकन कराते हैं। ताकि सरकारी स्कूलों में मिलने वाली योजनाओं का लाभ उठाया जा सके।

इस व्यवस्था को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों का ई-संबंधन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया हैं। इससे छात्रों के नामांकन और अन्य विवरण पोर्टल पर सुरक्षित रहेंगे और दोहरे नामांकन जैसी अनियमितताओं पर सख्ती से रोक लगाई जा सकेगी।

छात्रों के आधार और बैंक खाते का अनिवार्य सीडिंगः शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ अब केवल उन्हीं छात्रों को दिया जाएगा, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक हैं।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साइकिल, पोशाक और अन्य सरकारी योजनाओं की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके आधार सीडेड बैंक खातों में भेजी जाती हैं। जिन छात्रों का बैंक खाता आधार से लिंक नहीं हैं। उन्हें इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा।

सभी सरकारी स्कूलों के छात्रों के आधार निर्माण के निर्देशः शिक्षा विभाग ने जिला पदाधिकारियों से व्यक्तिगत रुचि लेते हुए सुनिश्चित करने का आग्रह किया हैं कि सभी सरकारी स्कूलों के छात्रों के आधार कार्ड बनवाए जाएं। इसके लिए प्रत्येक अनुमंडल के चिन्हित विद्यालयों में आधार किट पहले से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ताकि नामांकित सभी बच्चों का आधार पंजीकरण पूरा हो सके।

बिहार में शिक्षा व्यवस्था में सुधार का प्रयासः इस नए निर्देश के साथ बिहार शिक्षा विभाग सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सही लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा हैं।

निजी स्कूलों का पंजीकरण और आधार सीडिंग जैसी प्रक्रियाएं न केवल छात्रों के लाभ के लिए आवश्यक हैं, बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग रोका जा सकेगा।

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