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राजगीर आरडीएच प्लस टू स्कूल में एल्बेंडाजोल दवा जलाया, अभिभावकों में नाराजगी

Students’ deworming medicine allegedly set on fire inside RDH Plus Two School raises questions on administration’s conduct.

नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के ऐतिहासिक नगर राजगीर स्थित आरडीएच प्लस टू स्कूल में बच्चों को वितरित की जाने वाली एल्बेंडाजोल दवा को कथित रूप से विद्यालय परिसर में जलाए जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। मामले की चर्चा सामने आते ही अभिभावकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है और प्रशासन से जांच की मांग तेज हो गई है।

कृमि मुक्ति अभियान के तहत भेजी गई थी दवाः जानकारी के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए एल्बेंडाजोल दवा उपलब्ध कराई जाती है। इस दवा का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना तथा उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर बनाना है।

सूत्रों के मुताबिक आरडीएच प्लस टू स्कूल में भी इस अभियान के तहत पर्याप्त मात्रा में एल्बेंडाजोल दवा भेजी गई थी, ताकि विद्यालय में नामांकित सभी छात्र-छात्राओं को इसका सेवन कराया जा सके।

औपचारिकता निभाकर दवा जलाने का आरोपः स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि विद्यालय में महज औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ बच्चों के बीच दवा का वितरण किया गया। इसके बाद बची हुई बड़ी मात्रा में दवाओं को छात्रों में बांटने के बजाय विद्यालय परिसर में ही जला दिया गया।

यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही का मामला भी माना जाएगा।

अभिभावकों और स्थानीय लोगों में आक्रोशः घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर इस तरह की दवाएं उपलब्ध कराती है, लेकिन यदि विद्यालय स्तर पर ही लापरवाही बरती जाए तो पूरे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो जाते हैं।

कुछ अभिभावकों ने यह भी आशंका जताई कि यदि सभी बच्चों को दवा नहीं दी गई तो कई छात्र इस स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रम से वंचित रह गए होंगे।

प्रभारी प्राचार्य ने जताई अनभिज्ञताः इस संबंध में जब विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य इंदू सिन्हा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों के बीच दवा वितरण के लिए दवा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि दवा जलाए जाने की घटना को लेकर उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई घटना हुई है तो मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जांच की मांग तेजः घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अनुमंडल प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। नागरिकों ने अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

अभियान की विश्वसनीयता पर सवालः विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता काफी हद तक विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी और जागरूकता पर निर्भर करती है। यदि दवाओं का सही वितरण नहीं होता या उन्हें नष्ट कर दिया जाता है तो इससे न केवल सरकारी संसाधनों की हानि होती है बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।

अब सबकी निगाह प्रशासनिक जांच पर टिकी है कि आखिर दवा जलाने की घटना में कितनी सच्चाई है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।  स्रोतः मीडिया रिपोर्ट

मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »

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