बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार राज्य शिक्षा विभाग ने अपने शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए एक नवीनतम स्वचालित प्रणाली विकसित की है। इसे ‘कोड्यू फॉर प्रोमोशन’ नाम दिया गया है। जोकि जल्द ही ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से लागू किया जाएगा। इस नई प्रणाली के तहत हर शिक्षक को उनके निर्धारित समय पर पदोन्नति सुनिश्चित की जाएगी। जिससे वेतन, मानदेय और अन्य सेवा लाभ भी समय पर मिल सकेंगे।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब शिक्षक प्रोमोशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आएगी। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यदि किसी शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही या न्यायिक वाद लंबित नहीं है तो उसे समय से प्रोमोशन प्रदान किया जाएगा। इस स्वचालित प्रणाली के कारण वर्षों से लंबित प्रोमोशन और वेतन संबंधित मामलों का समाधान संभव होगा।
यह प्रणाली इ-शिक्षाकोष पोर्टल और साफ-सुथरी सेवा रिकॉर्ड पोर्टल से जुड़ेगी, जिससे सभी शिक्षकों की सेवा संबंधी जानकारियां डिजिटल रूप में रिकॉर्ड और ट्रैक की जाएंगी। इससे विभाग को प्रत्येक कर्मचारी की सेवा स्थिति की सही जानकारी मिलेगी और पदोन्नति का निर्णय त्वरित रूप से लिया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग ने पदोन्नति के साथ-साथ मानदेय, वेतन, पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ आदि के लिए भी संचालन निदेश (एसओपी) तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। इससे विभागीय स्तर पर इन सभी विषयों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी और त्वरित समाधान होगा, क्योंकि आज कई मामले सालों तक लंबित रहते हैं, जिससे शिक्षकों को आर्थिक व मनोवैज्ञानिक रूप से नुकसान होता है।
इस पहल पर बोलते हुए प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि हमारे शिक्षकों को समय पर उनकी मेहनत का फल मिले। पदोन्नति की प्रक्रिया में हो रही देरी और शिकायतें शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदायक हैं। इसलिए हमने विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द इस स्वचालित प्रोमोशन सिस्टम को लागू करें ताकि प्रत्येक शिक्षक को उसका हक मिल सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में शिक्षक पदोन्नति प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है, जो कई बार लंबित रहने की वजह से शिक्षकों में असंतोष की स्थिति पैदा करती रही है। नए स्वचालित प्रणाली के लागू होने से यह प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन जाएगी।
कोड्यू फॉर प्रोमोशन प्रणाली से बिहार के शिक्षकों को न्यायोचित और समयबद्ध पदोन्नति के साथ-साथ सेवा लाभ भी सुनिश्चित होंगे। जिससे शिक्षा विभाग में कार्य कुशलता और कर्मचारियों का मनोबल दोनों बढ़ेंगे। यह कदम बिहार शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा।








