अनुमंडलीय अस्पताल से लेकर PHC तक लगाए जाएंगे CCTV कैमरे

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अब जिले के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को और पुख्ता किया जाएगा। नालंदा जिले के अनुमंडलीय अस्पताल से लेकर प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस कदम से न केवल अस्पताल परिसरों में निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।

राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश के आलोक में यह पहल की जा रही है। जिले के डीपीएम श्याम कुमार निर्मल ने बताया कि सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई है।

इसके तहत प्रत्येक अस्पताल प्रभारी को अपने-अपने संस्थान का सर्वे कर यह रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है कि किन-किन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। यह रिपोर्ट जिला कार्यालय के माध्यम से राज्य मुख्यालय, पटना भेजी जाएगी, जहां से स्वीकृति मिलने के बाद कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बिहारशरीफ स्थित मॉडल अस्पताल में फिलहाल एजेंसी द्वारा कुछ ही स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं, जिससे अस्पताल के कई महत्वपूर्ण हिस्से जैसे कि प्रसव कक्ष, इमरजेंसी कॉरिडोर और दवा वितरण काउंटर निगरानी से बाहर हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने यहां एक कमांड कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां से कैमरों की मदद से पूरे परिसर पर नजर रखी जाती है। लेकिन सीमित कैमरों के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही थी।

अब मॉडल अस्पताल समेत अन्य सभी स्वास्थ्य केंद्रों में कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इससे न केवल चिकित्सीय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अस्पताल में होने वाली अनियमितताओं, झगड़े, चोरी जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर और सुरक्षित माहौल उपलब्ध हो सकेगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिला और राज्य स्तर से भी इन कैमरों की फीड को रियल टाइम में देखा जा सकेगा। इससे अधिकारियों को भी ग्राउंड रियलिटी जानने में मदद मिलेगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सीसीटीवी कैमरे जहां एक ओर अस्पताल में अनुशासन बनाए रखने में सहायक होंगे। वहीं चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यशैली में भी सुधार आएगा। मरीजों को समय पर सेवा मिल सकेगी और शिकायतों की जांच भी सटीक तरीके से की जा सकेगी।

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