बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सिपाही भर्ती घोटाला की परतें अब एक-एक करके खुलने लगी हैं। इस घोटाले ने न केवल बिहार की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को भी दांव पर लगा दिया है।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसमें यह बात सामने आई है कि सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने और उनकी आपूर्ति का ठेका कोलकाता की एक संदिग्ध ‘शेल’ कंपनी को दिया गया था। यह कंपनी पहले भी उत्तर प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों में आरोपी रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों के अनुसार प्रश्नपत्र छापने और आपूर्ति करने का ठेका कोलकाता की एक ऐसी कंपनी को दिया गया था, जो केवल कागजों पर अस्तित्व में थी। जांच में पता चला कि यह एक कमरे वाली ‘शेल’ कंपनी थी, जिसमें कोई कर्मचारी नहीं था और न ही इसके पास प्रश्नपत्र छापने की कोई उचित सुविधा थी। इस कंपनी ने छपाई और आपूर्ति का काम भी कोलकाता की ही एक अन्य कंपनी को आउटसोर्स कर दिया।
सूत्रों ने बताया कि यह कंपनी पहले भी विवादों में रही है। वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) और 2022 में अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों में इस कंपनी का नाम सामने आया था। इसके बावजूद बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा के लिए इस कंपनी को ठेका देना कई सवाल खड़े करता है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रश्नपत्रों के परिवहन, भंडारण और हैंडओवर की प्रक्रिया में निर्धारित मानक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रूप से राज्य के खजाने में भेजा जाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय इन्हें पटना में डीपी वर्ल्ड एक्सप्रेस लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले एक गोदाम में भेज दिया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रश्नपत्रों को छह दिनों तक इस गोदाम में रखा गया, बिना किसी अधिकृत अधिकारी को सूचित किए। इस दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता से समझौता होने की पूरी आशंका है।
ईडी और अन्य जांच एजेंसियां अब इस मामले में गहराई से पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में बड़े स्तर पर सांठगांठ की आशंका है, जिसमें भर्ती बोर्ड के कुछ अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने न केवल बिहार पुलिस भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के बीच आक्रोश भी पैदा किया है, जो वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
इस घोटाले का खुलासा होने के बाद अभ्यर्थियों में गुस्सा और निराशा का माहौल है। नालंदा के एक अभ्यर्थी राकेश कुमार ने कहा कि हम लोग रात-दिन मेहनत करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक की खबर आती है। सरकार और भर्ती बोर्ड की लापरवाही की सजा हमें क्यों भुगतनी पड़ रही है? अभ्यर्थियों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
फिलहाल जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और संदिग्ध कंपनी के मालिकों और कर्मचारियों की तलाश की जा रही है। साथ ही भर्ती बोर्ड के उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने इस कंपनी को ठेका देने का फैसला किया। जांच के परिणाम और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार अब हर उस अभ्यर्थी को है। जिसने इस परीक्षा में अपनी मेहनत और सपनों को दांव पर लगाया था।





