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शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला, शिक्षक संघ ने उठाई आवाज

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार अराजपत्रित प्रारम्भिक शिक्षक संघ की नालंदा जिला इकाई की मंत्री परिषद की एक आपात बैठक में शिक्षक नेताओं ने शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ तीखा रोष व्यक्त किया। शिक्षकों ने विभाग की कार्यशैली को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि विभाग भ्रष्टाचार में पूरी तरह डूब चुका है, जिसके चलते शिक्षक कार्यालयों की अनियमितताओं और लापरवाही से त्रस्त हैं।

शिक्षक नेताओं ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद विभाग केवल स्पष्टीकरण मांगकर मामले को रफा-दफा कर देता है। दूसरी ओर शिक्षकों पर नियमविरुद्ध कार्रवाई और वेतन कटौती जैसे कठोर कदम उठाए जा रहे हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षकों को कार्यालय में आने से रोकने और उनकी समस्याओं के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को आवेदन देने का आदेश जारी किया गया है, लेकिन बीईओ अपने मुख्यालय पर मौजूद ही नहीं रहते।

संघ ने मांग की है कि शिक्षकों के सभी कार्यों के लिए एक निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए ताकि उनकी समस्याओं का समयबद्ध निपटारा हो सके।

शिक्षक नेताओं ने बीईओ की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि हिलसा के बीईओ को हरनौत, थरथरी के बीईओ को बेन और कतरीसराय के बीईओ को इस्लामपुर प्रखंड का प्रभार किन परिस्थितियों में सौंपा गया?

नेताओं ने आरोप लगाया कि इन नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी है। इसके अलावा, हरनौत में शैक्षणिक सत्र के छह माह बीत जाने के बाद भी छात्रों को पाठ्य पुस्तकें नहीं मिली हैं। अन्य प्रखंडों में भी कमोबेश यही स्थिति है।

सरकारी विद्यालयों में खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए आयोजित मशाल-2024 कार्यक्रम भी विवादों में घिरा हुआ है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि बिहारशरीफ में पदस्थापित बीईओ ने मशाल-2024 के किसी भी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए छात्र-छात्राओं को बिना पंजीकरण के ही राजगीर भेज दिया गया। अस्थावां में साइकिल रेस में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा की जगह किसी अन्य छात्रा को भेजने का मामला सामने आया। इस मामले में बीईओ के खिलाफ कार्रवाई के बजाय प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा गया।

शिक्षक नेताओं ने बताया कि अंतर वेतन भुगतान, सेवानिवृत्ति लाभ, भविष्य निधि में संचित राशि का हिसाब और एमएसीपीएस जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शिक्षकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। बाबुओं को रिश्वत न देने पर उनके कार्य लंबित रखे जाते हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत व्हाट्सएप के जरिए तुगलकी फरमान जारी किए जाते हैं, जिसमें कठोर कार्रवाई की धमकी दी जाती है।

इसके अलावा विद्यालयों को प्राप्त राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में शिक्षकों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि राशि व्यय करने और उपयोगिता प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए कोई प्रशिक्षण या बैठक नहीं आयोजित की जाती, जिसके कारण शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी होती है।

संघ ने शिक्षा विभाग से शिक्षकों के कार्यों के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित की जाए, बीईओ की नियुक्ति और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए, पाठ्य पुस्तकों का समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए, मशाल-2024 जैसे आयोजनों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो, रिश्वतखोरी और कार्यालयी भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, उपयोगिता प्रमाण पत्र और अन्य कार्यों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाए जैसे मांग शामिल हैं।

शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग का भ्रष्टाचार न केवल शिक्षकों के लिए, बल्कि पूरे शैक्षणिक ढांचे और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए खतरा है।

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