CS ने चंडी और नगरनौसा अस्पताल किया निरीक्षण, 2 डॉक्टर समेत 4 कर्मी नपे

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिला साविल सर्जन (CS) डॉ. श्यामा राय ने दो अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान दो डॉक्टर समेत चार स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित पाये गये। अनुपस्थित कर्मियों से इस बाबत जवाब तलब किया गया है। साथ ही अनुपस्थित अवधि के वेतन पर रोक लगा दी है। स्पष्टीकरण का जवाब प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से देने को कहा गया है।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि डॉक्टर से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों तक की उपस्थिति समय पर सुनिश्चित करें।

चंडी रेफरल अस्पताल का किया गया निरीक्षणः सिविल सर्जन डॉ. श्यामा राय ने बताया कि 25 जून को अपराहन 12.45 में चंडी रेफरल अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ड्यूटी पर तैनात पाये गये।

ओपीडी के निरीक्षण के दौरान 162 मरीजों का इलाज चिकित्सकों द्वारा किया जा चुका था। ओपीडी में 102 प्रकार व आइपीडी में 52 तरह की दवाइयां तथा कनसुमबेल में 181 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध थी।

प्रसव कक्ष के निरीक्षण के दौरान तक दो संस्थागत प्रसव हुआ था। टीका केंद्र में 18 बच्चों को टीकाकरण किया गया था। दवा भंडार के फार्मासिस्ट के सेवानिवृत्त के बाद भंडार का पूर्ण प्रभार नहीं सौंपा पाया गया।

सिविल सर्जन ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के अंदर दवा भंडार का प्रभार ग्रहण कराना सुनिश्चित करायें।

नगरनौसा पीएचसी की जांच की गयीः सिविल सर्जन डॉ. राय ने बताया कि 25 जून को ही दोपहर बाद 2.30 बजे नगरनौसा पीएचसी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थिति पंजी में उपस्थिति दर्ज अनुपस्थित पाये गये।

उन्होंने बताया कि चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अल्का राम अनुपस्थित पायी गयी। एएनएम रेणु कुमारी भी अनुपस्थित पायी गयी। इसी तरह एएनएम गिरिजा देवी अनुपस्थित थी। स्वास्थ्य प्रबंधक द्वारा बताया गया कि श्रीमती गिरिजा देवी की ड्यूटी रात्रि में निर्धारित है।

निर्देश दिया गया कि उपस्थिति पंजी में रात्रि ड्यूटी दर्ज कर दें। ओपीडी के निरीक्षण के दौरान 103 मरीजों का इलाज किया गया था। ओपीडी में 143, आइपीडी में 71 प्रकार की दवा तथा कनसुमबेल में 214 प्रकार दवा उपलब्ध थी। प्रसव कक्ष के निरीक्षण के दौरान तक तीन प्रसव हुआ था।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि अनुपस्थित डॉक्टर एवं कर्मियों से स्पष्टीकरण प्राप्त कर मंतव्य के साथ प्रतिवेदन भेजें। साथ ही अनुपस्थित अवधि के वेतन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी।

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