दस माह बाद भी हत्या कांड में कार्रवाई नहीं, इंसाफ के लिए DGP तक पहुंची मां

दीपनगर थाना में तीन थानेदार बदले, फिर भी नहीं हुई आरोपियों की गिरफ्तारी; जांच पर उठे सवाल

नालंदा दर्पण डेस्क। दीपनगर थाना क्षेत्र में हुए एक सनसनीखेज हत्या कांड को दस महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। मामले में कार्रवाई की धीमी रफ्तार से पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, वहीं पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

मृतक सूरज कुमार की मां ने बताया कि उनके बेटे को घर से बुलाकर उसकी हत्या कर दी गई थी और शव को देवीसराय खंधा में फेंक दिया गया था। इस मामले में दीपनगर थाना कांड संख्या-270/25 (दिनांक 25 जून 2025) दर्ज किया गया था, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

पीड़िता का आरोप है कि इस दौरान थाने में तीन-तीन थानाध्यक्ष बदल चुके हैं, फिर भी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई। उनका कहना है कि बेटे के लापता होने के बाद एक संदिग्ध नंबर से कॉल आया था, जिसमें बेटे से बात कराने की बात कही गई थी। बाद में उसी नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन बंद मिला।

घटना की रात पीड़िता के भतीजे द्वारा किए गए कॉल पर एक महिला ने फोन उठाया और अजीबोगरीब बातें करते हुए केस करने की धमकी दी। पीड़िता ने इन सभी तथ्यों की जानकारी लिखित रूप में पुलिस को दी, लेकिन अब तक इन बिंदुओं पर कोई ठोस जांच नहीं की गई है।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पीड़िता के घर के पास स्थित एक निजी स्कूल के सीसीटीवी कैमरे में सूरज कुमार के जाने की तस्वीर कैद होने का दावा किया गया है। बावजूद इसके पुलिस ने अब तक उस फुटेज को जांच का हिस्सा नहीं बनाया है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीड़िता ने बताया कि उन्होंने कई बार पुलिस अधीक्षक, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी और डीजीपी कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। न्याय की उम्मीद में लगातार प्रयास करने के बाद अब वह थक चुकी हैं।

स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि जब हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं होती है, तो कानून-व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं न कहीं लापरवाही या दबाव के कारण आरोपी बच रहे हैं।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जाए। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा दी जा सके।

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