
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद नालंदा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एकंगरसराय में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विभागीय नियमों के विपरीत प्रतिनियुक्ति पर आए चिकित्सक को प्रभारी बनाए जाने के आरोपों ने स्वास्थ्य महकमे की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव द्वारा हाल ही में जारी एक पत्र में सभी जिलों के असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि अधीनस्थ चिकित्सा संस्थानों में पदस्थापित वरीय चिकित्सकों को ही प्रभारी-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (डीडीओ) नियुक्त किया जाए। पत्र में यह भी कहा गया था कि दूसरे संस्थान से चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति कर प्रभारी बनाना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा। इसके बावजूद नालंदा जिले में जारी आदेश ने विभागीय निर्देशों की अनुपालना पर ही प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
डॉ. अनिल कुमार भारती को मिला प्रभारः असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, नालंदा द्वारा जारी आदेश के अनुसार अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोशियावां में पदस्थापित डॉ. अनिल कुमार भारती को बिहार कोषागार नियमावली 2011 के नियम 84 के तहत सीएचसी एकंगरसराय एवं उससे संबद्ध इकाइयों का निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी घोषित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का दायित्व सौंपा गया है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों द्वारा पूर्व प्रभारी के खिलाफ दिए गए अभ्यावेदन तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। साथ ही तत्कालीन प्रभारी डॉ. स्नेहलता वर्मा को विधिवत प्रभार हस्तांतरित करने का निर्देश भी जारी किया गया है।
बिना स्पष्टीकरण हटाने पर उठे सवालः प्रभारी पद से हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अंदर ही असंतोष की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले स्पष्टीकरण मांगा जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
चिकित्सकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब संस्थान में वरीय चिकित्सक उपलब्ध थे तो दूसरे संस्थान से प्रतिनियुक्त चिकित्सक को प्रभारी क्यों बनाया गया। इसे विभागीय आदेश और स्थापित प्रशासनिक परंपरा दोनों के विपरीत बताया जा रहा है।
ड्यूटी रोस्टर विवाद बना वजह? जानकारी के अनुसार सीएचसी एकंगरसराय में ड्यूटी रोस्टर को लेकर लंबे समय से अंदरूनी विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि पूर्व प्रभारी द्वारा चिकित्सकों की ड्यूटी तय नियमों के अनुसार निर्धारित की जा रही थी, जिससे कुछ चिकित्सक असंतुष्ट थे।
सूत्रों का दावा है कि इसी मुद्दे को लेकर आंतरिक खींचतान बढ़ी और बाद में उच्चस्तरीय पैरवी के जरिए प्रशासनिक बदलाव कराया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
विभाग ने पहले ही दी थी चेतावनीः स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव द्वारा जारी पत्र में यह भी कहा गया था कि कई जिलों में विभागीय निर्देशों की अवहेलना कर दूसरे संस्थानों से चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति कर प्रभारी-सह-डीडीओ बनाया जा रहा है। इस पर विधानमंडल और न्यायालयों में भी सवाल उठ चुके हैं।
पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि विशेष परिस्थिति में ही सक्षम प्राधिकार की अनुमति लेकर प्रतिनियुक्ति की जा सकती है। अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और जांच की मांग तेजः सीएचसी एकंगरसराय में हुए इस प्रशासनिक बदलाव के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर विभागीय नियमों के अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला अब जिले के स्वास्थ्य प्रशासन में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।






