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निजी क्लिनिक में प्रसूता की मौत को लेकर परिजनों ने किया NH-20 जाम !

इस प्रसुता की निजी क्लिनिक में मौत ने न केवल उनके परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है, बल्कि यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। इस मामले में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं…

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। दीपनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत देवीसराय बाईपास के निकट एक निजी क्लिनिक में कथित तौर पर डॉक्टर की लापरवाही के कारण प्रसव के बाद एक 28 वर्षीय महिला की मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-20 (NH-20) को जाम कर दिया। इस जाम के कारण पटना-रांची मार्ग पर घंटा भऱ भी यातायात पूरी तरह ठप रहा।

मृतका चंडी थाना क्षेत्र के बदरवाली गांव निवासी राहुल कुमार की पत्नी खुशबू कुमारी थी। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के लिए क्लिनिक में भर्ती कराने के दौरान डॉक्टर ने उनसे 60 हजार रुपये की मोटी रकम वसूली थी। इसके अतिरिक्त खून की कमी का हवाला देकर खून की व्यवस्था के लिए 10 हजार रुपये और लिए गए। अचानक खुशबू की तबीयत बिगड़ने लगी और कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई।

परिजनों का कहना है कि क्लिनिक के डॉक्टरों ने अपनी गलती छिपाने की कोशिश में मृतका को एक बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया, लेकिन उनका दावा है कि रेफर करने से पहले ही खुशबू की मौत हो चुकी थी। राहत की बात यह रही कि नवजात शिशु पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।

खुशबू की मौत की खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने क्लिनिक के बाहर हंगामा शुरू कर दिया और मुआवजे की मांग के साथ दोषी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद भीड़ ने NH-20 को जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। जाम की वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जाम की सूचना मिलते ही दीपनगर थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत की और उन्हें समझा-बुझाकर शांत कराया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने सड़क जाम को हटवाया और यातायात को सामान्य किया।

पुलिस का कहना है कि परिजनों से लिखित शिकायत प्राप्त होने के बाद क्लिनिक के डॉक्टर और संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मृतका के शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा। घटना के बाद से क्लिनिक का डॉक्टर और संचालक फरार हैं।

यह घटना एक बार फिर निजी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर उचित इलाज और देखभाल की जाती, तो शायद खुशबू की जान बचाई जा सकती थी। प्रशासन इस मामले की गहन जांच करे और दोषियों को कड़ी सजा दे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही उन्होंने मृतका के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग भी की है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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