धरोहर
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बिहारशरीफ विक्टोरिया क्लब दिलाती है ब्रिटिश युग की याद
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ शहर के हृदय स्थल टिकुलीपर में स्थित विक्टोरिया क्लब आज भी ब्रिटिश युग की यादों को संजोए हुए है, जहां क्लब कल्चर की जीवंत परंपरा न केवल बरकरार है, बल्कि आधुनिकता के साथ घुलमिलकर एक नई ऊर्जा पैदा कर रही है। यह क्लब 120 वर्षों से अधिक…
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बिहारशरीफ नवरत्न महल: सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल गहना
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ के मोगलकुआं में स्थित नवरत्न महल नालंदा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अनमोल रत्न है। करीब ढाई सौ साल पुराना यह भवन 18वीं सदी की स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो अपने समय का एक वातानुकूलित चमत्कार था। मोटी दीवारों और चार मजबूत स्तंभों…
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बिहारशरीफ खादी भवन: गौरवशाली अतीत से अस्तित्व की लड़ाई तक
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ नगर के हृदय में स्थित खादी भवन कभी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी की मिसाल हुआ करता था। चार दशक पहले यहाँ लाखों का कारोबार होता था और खादी के परिधानों की सुगंध देश के कोने-कोने तक पहुँचती थी। लेकिन आज यह ऐतिहासिक भवन अपनी साख और अस्तित्व बचाने…
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160 साल पहले बेले सराय था बिहारशरीफ एसडीओ कार्यालय भवन
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ नालंदा जिले का एक ऐसा मुख्यालय शहर है, जो न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का खजाना है, बल्कि प्रशासनिक गौरव का भी प्रतीक है। आज का आधुनिक बिहारशरीफ एसडीओ कार्यालय एक ऐसी कहानी बयाँ करता है, जो 160 साल पहले की है। यह कहानी है वर्ष…
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बिहारशरीफ नगर निगम का 156 वर्षों से गौरवमयी साक्षी है यह द्वार
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ एक ऐसा शहर है, जो न केवल जिला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि अपने प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से विकास की गाथा भी लिखता रहा है। बिहारशरीफ नगर निगम कभी एक छोटी-सी नगरपालिका के रूप में शुरू हुआ था और…
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जेठियन राजगीर यात्राः बुद्ध पथ से विद्या की राजधानी तक का स्वर्णिम युग
नालंदा दर्पण डेस्क। जेठियन से राजगीर की ओर बढ़ते हुए पहाड़ी रास्तों पर बौद्ध भिक्षुओं के कदमों की गूंज नालंदा की प्राचीन भूमि को जीवंत करती है। यह वही पथ है, जिसे कभी भगवान बुद्ध ने बोधगया से राजगीर जाते समय अपनाया था। हरे-भरे पहाड़, शांत वादियाँ और भिक्षुओं के परंपरागत…
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हरनौत राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय: गौरवशाली इतिहास बनी अवशेषों की कहानी
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड क्षेत्र में सेबदह गांव की शांत गलियों में बसा राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय आज भले ही खामोश खड़ा हो, लेकिन इसकी दीवारें एक ऐसी कहानी बयां करती हैं, जो भारत की आजादी की लड़ाई और बिहार की शैक्षणिक विरासत से गहरे तक जुड़ी है।…
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अमावां महल: नालंदा की शान, इतिहास की पहचान
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के बिंद प्रखंड में स्थित अमावां महल आज भी अपनी भव्यता और इतिहास की गूंज से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह महल केवल पत्थरों और ईंटों का ढांचा नहीं, बल्कि एक बड़ी रियासत की कहानी है। इस रियासत ने अपने समय में नालंदा…
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दिल्ली दरबार लाल किलाः बदहाली का शिकार इस्लामपुर की यह शान
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के इस्लामपुर नगर क्षेत्र में स्थित दिल्ली दरबार को स्थानीय लोग प्यार से लाल किला भी कहते हैं। यह एक ऐसी भव्य इमारत है, जो अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान की बदहाली की कहानी बयां करती है। यह दो मंजिला संरचना कभी जमींदार चौधरी जहुर साहब…
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राजगीर को राजगृह करने का प्रस्ताव पारित, DM से मांगी रिपोर्ट
राजगीर (नालंदा दर्पण)। बिहार की ऐतिहासिक नगरी राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी के रूप में राजगृह के नाम से विख्यात थी। अब स्थानीय जनता, सामाजिक संगठनों और धार्मिक नेताओं द्वारा राजगीर का नाम बदलकर राजगृह करने की मांग को समर्थन किया जा रहा है। इस मांग को बल देने के…









