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Human Trafficking: बकरी चरा रही मासूम किशोरी को अगवा कर 6 हजार में बेचा

अस्थावां (नालंदा दर्पण ब्यूरो)। ग्रामीण भारत की सादगी भरी जिंदगी में कभी-कभी ऐसी भयावह घटना (Human Trafficking) घटी हैं, जो रोंगटे खड़े कर देती हैं। अस्थावां थाना क्षेत्र के महमदपुर बेलदरिया गांव में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। मात्र 13 वर्ष की एक मासूम किशोरी अपने परिवार की आजीविका के लिए बकरी चरा रही थी और  दो महिलाओं के चंगुल में फंस गई। उसे अगवा कर महज 6 हजार रुपये में बेच दिया गया। यह घटना न केवल मानव तस्करी के काले कारोबार का नंगा चेहरा उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों की असुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।

बताया जाता है कि नैना देवी की नातिन गांव के बाहर हरी-भरी चरागाह में अपनी बकरियों को चरा रही थी। लेकिन दो स्थानीय महिलाओं ने उसे बहला-फुसलाकर एक चार पहिया वाहन में बिठा लिया। जब तक परिवार को खबर लगी, किशोरी का कोई सुराग नहीं बचा। नैना देवी ने तुरंत अस्थावां थाने में शिकायत दर्ज कराई।

गांव के अन्य बच्चों की गवाही ने पुलिस को संदिग्धों की ओर इशारा किया। सूचना तंत्र के बल पर थानाध्यक्ष उत्तम कुमार की टीम ने त्वरित कार्रवाई की। संदेह के घेरे में आईं दो महिलाएं वासो चौहान की पत्नी रानी देवी और कृष्णा चौहान की पत्नी मंजू देवी को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में इनका काला कारनामा खुल गया।

महिलाओं ने कबूल किया कि वे एक ह्यूमन ट्रैफिकिंग गिरोह का हिस्सा हैं। किशोरी को पहले अस्थावां से बिहारशरीफ के खंदकपर इलाके में मंजू देवी के किराए के कमरे पर ले जाया गया। वहां उसका हुलिया बदल दिया गया। फिर महज 6 हजार रुपये के लालच में उसे जहानाबाद की एक महिला को बेच दिया गया, जो गिरोह की एक सदस्य की समधिन बताई जाती है।

पुलिस की चतुराई ने इस अपराध को और गहरा जाने से रोक लिया। जब गिरफ्तारी की भनक लगी तो जहानाबाद वाली महिला घबरा गई। उसने किशोरी को बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन पर अकेला छोड़ दिया और फरार हो गई। सौभाग्य से स्टेशन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने संदिग्ध बच्ची को नोटिस किया और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। थानाध्यक्ष उत्तम कुमार ने बताया कि हमें सूचना मिलते ही हमारी टीम ने महिलाओं को घेर लिया। पूछताछ में सारा राज खुल गया। बच्ची को सुरक्षित बरामद कर उसके परिवार को सौंप दिया गया। प्रारंभिक जांच में यह मामला ह्यूमन ट्रैफिकिंग का साफ दिख रहा है। हम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटे हैं।

गिरफ्तार महिलाओं से बरामद सामान में वाहन के कागजात, नकली पहचान पत्र और कुछ नकदी मिली, जो उनके अपराधी कनेक्शन की ओर इशारा करती है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह ग्रामीण क्षेत्रों से गरीब लड़कियों को अगवा कर महानगरों में बेचने का काम करता था, लेकिन इस बार योजना अधर में लटक गई।

विशेषज्ञों के अनुसार बिहार में हर साल सैकड़ों बच्चे और महिलाएं इस काले कारोबार की शिकार बनते हैं। आर्थिक तंगी, शिक्षा की कमी और जागरूकता का अभाव इसे आसान बना देता है। नैना देवी जैसे परिवारों की आवाज बनकर पुलिस ने एक जान बचाई, लेकिन सवाल यह है कि कब तक ऐसी घटनाएं ग्रामीण इलाकों को डराएंगी?

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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