इस्लामपुरखेती-बारीनालंदाफीचर्डहिलसा

कृषि अनुसंधान संस्थान पटना में मनाया गया आयुर्वेद दिवस, किसानों के बीच 15 हजार तुलसी पौधों का वितरण

लखीसराय के जनजातीय किसानों के बीच तुलसी के पौधों का वितरण, विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की पहचान और उपयोगिता की दी गई जानकारी

इस्लामपुर (नालंदा दर्पण)। आयुर्वेद दिवस 2026 के अवसर पर पान अनुसंधान केन्द्र, इस्लामपुर (बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर) के तत्वावधान में कृषि अनुसंधान संस्थान (ARI), पटना में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय Ayurveda for a Healthier Tomorrow तथा थीम One Health, One Future: Integrating Ayurveda Science through Evidence, Innovation and Holistic Care रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह ने की। वहीं कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस. एन. दास की प्रमुख उपस्थिति रही।

इस अवसर पर डॉ. एस. एन. दास ने बताया कि आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के तहत लखीसराय जिले के जनजातीय किसानों के बीच लगभग 15,000 तुलसी के पौधों का वितरण किया गया। यह पहल जिला उद्यान पदाधिकारी राजीव रंजन एवं जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार के आग्रह और समन्वय से संपन्न हुई।

किसानों को तुलसी सहित अन्य औषधीय पौधों की उपयोगिता, संरक्षण और उनके स्वास्थ्य तथा आजीविका से जुड़े महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण को ग्रामीण स्तर पर प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

विद्यार्थियों को कराया गया औषधीय पौधों का व्यावहारिक परिचय

कार्यक्रम में RAWE छात्रा वर्षा कुमारी सहित लगभग 40-45 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को विभिन्न औषधीय पौधों की पहचान, उनके उपयोग और औषधीय गुणों के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इससे विद्यार्थियों को कृषि अनुसंधान और आयुर्वेद के बीच संबंधों को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में डॉ. एस. पी. सिन्हा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. प्रभात कुमार एवं डॉ. अजीत कुमार पांडेय समेत वैज्ञानिक, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य किसानों और विद्यार्थियों के बीच औषधीय पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इनके संरक्षण को प्रोत्साहित करना तथा आयुर्वेद और वैज्ञानिक कृषि अनुसंधान के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा। तुलसी के हजारों पौधों का वितरण इस पहल को केवल जागरूकता कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय किसानों के स्तर पर औषधीय पौधों के संरक्षण और उपयोग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.