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अब जमीन कागजात सुधार में लापरवाही पर सीधे CO नपेंगे

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन कागजात सुधार प्रक्रिया को और सख्त करने का निर्देश दिया है। अब अधिकारी आवेदकों से मिले बिना उनके आवेदनों को वापस नहीं कर सकेंगे। इसका उद्देश्य जमीन से संबंधित गलत तथ्यों को तय समय में सुधारना, विवादों का निपटारा करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है।

विभाग ने स्पष्ट किया कि बेवजह आवेदन वापस करने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई होगी। यह व्यवस्था परिमार्जन प्लस पोर्टल के माध्यम से लागू की गई है, जहां जमीन कागजातों में त्रुटि सुधार के लिए आवेदन किए जाते हैं।

हाल की समीक्षा में पाया गया कि राज्य के 10 जिलों के 12 अंचलों में परिमार्जन प्लस के तहत सुधार कार्य संतोषजनक नहीं हुआ। इनमें औरंगाबाद, पटना (दीदारगंज, पुनपुन, बिहटा), नवादा (अकबरपुर), बक्सर (चक्की), नालंदा (राजगीर), पूर्णिया (पूर्णिया पूर्वी), कटिहार (कुरसेला), समस्तीपुर (रोसड़ा), वैशाली (भगवानपुर) और पश्चिम चंपारण (जोगापट्टी) शामिल हैं। इन अंचलों में आवेदनों की वापसी की संख्या भी अधिक रही।

साथ ही अन्य सात अंचलों- औरंगाबाद, गोपालगंज (भोरे), बक्सर (चौगाई), पटना (संपतचक), पूर्णिया (कृत्यानंदनगर), भागलपुर (रंगराचौक) और पश्चिम चंपारण (सिकटा) में कंप्यूटराइजेशन से छूटे जमाबंदी मामलों का निष्पादन औसत से काफी कम रहा।

विभाग ने सभी संबंधित सर्किल ऑफिसर्स (सीओ) को लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए हैं। इस कदम से जमीन विवादों के समाधान में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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