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मनोरम प्रकृति और बुद्ध की शांति का अनूठा संगम है राजगीर घोड़ाकटोरा झील

नालंदा दर्पण डेस्क। पर्यटन की दृष्टि से ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण राजगीर घोड़ाकटोरा झील देश-विदेश के सैलानियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन चुका है। तीनों ओर से सुरम्य पहाड़ियों से घिरा यह झील प्रकृति की गोद में बसा एक ऐसा रमणीय स्थल है, जहां कदम रखते ही मन को अद्भुत शांति और गहरा सुकून का अनुभव होता है।

चारों तरफ फैली हरियाली, घनघोर जंगल, शांत जलराशि और स्वच्छ वातावरण इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। घोड़ाकटोरा झील तक पहुंचने का मार्ग भी अपने आप में एक अनूठा और यादगार अनुभव है।

घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरते हुए जब सैलानी इस झील तक पहुंचते हैं, तो रास्ते भर प्रकृति के मनोरम दृश्य उनका मन मोह लेते हैं। पक्षियों की चहचहाहट, पेड़ों की सरसराहट और ठंडी हवा का स्पर्श पर्यटकों को प्रकृति के और भी निकट ले आता है।

यही कारण है कि प्रकृति प्रेमी, पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग और फोटोग्राफी के शौकीन बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। हरियाली से आच्छादित पहाड़, घनघोर जंगल, शांत जलराशि और स्वच्छ वातावरण इसे अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान प्रदान करता है।

झील के आसपास का वातावरण इतना मनमोहक है कि सैलानी भगवान बुद्ध की प्रतिमा और झील में तैरते बत्तखों के झुंड के साथ फोटोग्राफी और सेल्फी लेने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। यह दृश्य न केवल कैमरे में कैद करने लायक होता है, बल्कि लंबे समय तक स्मृतियों में बस जाता है।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के पर्यटक यहां की प्राकृतिक छटा से मंत्रमुग्ध नजर आते हैं। घोड़ाकटोरा झील क्षेत्र को ईको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जो इसे और भी खास बनाता है। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यहां कार्बन मुक्त वाहनों का ही उपयोग किया जाता है।

सैलानियों को झील तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक और बैटरी चालित वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांत, स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त वातावरण बना रहता है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है।

झील के मध्य में स्थापित भगवान बुद्ध की विशाल और भव्य प्रतिमा इस स्थल की आध्यात्मिक पहचान को और भी सशक्त बनाती है। यह प्रतिमा दूर से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। देशी ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी इस प्रतिमा को देखने और इसके साथ यादगार पल संजोने के लिए यहां पहुंचते हैं।

झील के शांत जल में बुद्ध प्रतिमा का प्रतिबिंब एक अलौकिक और दिव्य दृश्य प्रस्तुत करता है, जो मन को गहरी शांति प्रदान करता है। घोड़ाकटोरा झील आए और नौका विहार न किया, ऐसा शायद ही कोई सैलानी होगा। झील में नौका विहार करते हुए चारों ओर फैली पहाड़ियां, हरियाली और सामने नजर आती बुद्ध प्रतिमा का दृश्य पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।

शांत जल पर नाव की हल्की लहरें और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम मन को भीतर तक सुकून से भर देता है। कुल मिलाकर घोड़ाकटोरा झील राजगीर के पर्यटन मानचित्र पर एक ऐसा स्थल है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

Nalanda Darpan

नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के संचालक-संपादक वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके। More »

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