खोज-खबर
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160 साल पहले बेले सराय था बिहारशरीफ एसडीओ कार्यालय भवन
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहारशरीफ नालंदा जिले का एक ऐसा मुख्यालय शहर है, जो न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का खजाना है, बल्कि प्रशासनिक गौरव का भी प्रतीक है। आज का आधुनिक बिहारशरीफ एसडीओ कार्यालय एक ऐसी कहानी बयाँ करता है, जो 160 साल पहले की है। यह कहानी है वर्ष…
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बिहारशरीफ नगर निगम का 156 वर्षों से गौरवमयी साक्षी है यह द्वार
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ एक ऐसा शहर है, जो न केवल जिला की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है, बल्कि अपने प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से विकास की गाथा भी लिखता रहा है। बिहारशरीफ नगर निगम कभी एक छोटी-सी नगरपालिका के रूप में शुरू हुआ था और…
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हरनौत राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय: गौरवशाली इतिहास बनी अवशेषों की कहानी
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड क्षेत्र में सेबदह गांव की शांत गलियों में बसा राजेन्द्र साहित्य महाविद्यालय आज भले ही खामोश खड़ा हो, लेकिन इसकी दीवारें एक ऐसी कहानी बयां करती हैं, जो भारत की आजादी की लड़ाई और बिहार की शैक्षणिक विरासत से गहरे तक जुड़ी है।…
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अमावां महल: नालंदा की शान, इतिहास की पहचान
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के बिंद प्रखंड में स्थित अमावां महल आज भी अपनी भव्यता और इतिहास की गूंज से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह महल केवल पत्थरों और ईंटों का ढांचा नहीं, बल्कि एक बड़ी रियासत की कहानी है। इस रियासत ने अपने समय में नालंदा…
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दिल्ली दरबार लाल किलाः बदहाली का शिकार इस्लामपुर की यह शान
नालंदा दर्पण डेस्क। नालंदा जिले के इस्लामपुर नगर क्षेत्र में स्थित दिल्ली दरबार को स्थानीय लोग प्यार से लाल किला भी कहते हैं। यह एक ऐसी भव्य इमारत है, जो अपने गौरवशाली अतीत और वर्तमान की बदहाली की कहानी बयां करती है। यह दो मंजिला संरचना कभी जमींदार चौधरी जहुर साहब…
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अधर में लटका राजगीर अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का इंतजार, जानें बड़ी वजह
राजगीर (नालंदा दर्पण)। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक राजगीर कभी विश्व की प्राचीनतम नालंदा विश्वविद्यालय का गौरव रहा है, लेकिन आज एक अदद बुनियादी आवश्यकता अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय के लिए तीन दशकों से अधिक समय से प्रतीक्षा कर रहा है। यह लंबी प्रतीक्षा न केवल प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाती है,…
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हिलसा एसयू कॉलेज का जर्जर हॉस्टल खतरे की बड़ी घंटी, फिर भी अनदेखी!
हिलसा (नालंदा दर्पण)। मगध विश्वविद्यालय से अलग होकर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के गठन के बाद भले ही पटना और नालंदा जिले के कॉलेजों को नई पहचान मिली हो, लेकिन हिलसा अनुमंडल के एकमात्र अंगीभूत इकाई, एसयू कॉलेज के हॉस्टल की स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है। वर्ष 1955 में निर्मित यह…
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नव नालंदा महाविहार: पाली और बौद्ध अध्ययन का एक चमकता सितारा
नालंदा दर्पण डेस्क / मुकेश भारतीय। क्या आपने कभी उस स्थान की कल्पना की है, जहाँ प्राचीन काल में विश्व भर के विद्वान ज्ञान की खोज में एकत्रित होते थे? जी हाँ, नव नालंदा महाविहार कभी विश्व का प्रथम आवासीय विश्वविद्यालय था। जोकि ऐसी ही एक पवित्र भूमि थी। पाँचवीं शताब्दी…
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Ganga Water Diversion Project: अब बिहारशरीफ नगर में बहेगी गंगा की धार
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। Ganga Water Diversion Project: नालंदा की ऐतिहासिक धरती जहां कभी प्राचीन विश्वविद्यालय की गूंज थी, आज एक आधुनिक चुनौती जल संकट से जूझ रही है। गर्मियों में सूखे नल, लंबी कतारें और पानी के लिए संघर्ष इस शहर की कहानी बन चुकी थी। लेकिन अब गंगा जल उद्वह…
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अजीमाबाद एक्सप्रेस की सुविधा से चहका नालंदा पर्यटन शिक्षा क्षेत्र
राजगीर (नालंदा दर्पण)। भारतीय रेलवे द्वारा अजीमाबाद एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12947/12948) के राजगीर तक विस्तार ने न केवल यात्रियों को सुगम रेल कनेक्टिविटी दी है, बल्कि इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर और चमकदार बना दिया है। यह ट्रेन नालंदा, नवादा,…









