सिलावनालंदाप्रशासनबिग ब्रेकिंगभ्रष्टाचारराजगीर

सिलाव CO ने मुख्य सचिव और राजस्व विभाग के आदेश की उड़ाई धज्जियाँ

सिलाव (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार के मुख्य सचिव और राजस्व विभाग के स्पष्ट आदेश के बावजूद सिलाव अंचलाधिकारी (CO) पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा है।

नागेंद्र प्रसाद सिंह द्वारा दायर शिकायत के आधार पर राजस्व निगरानी सेल ने स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद सिंह के नाम पर संधारित पंजी-2 में कायम जमाबंदी संख्या के फॉलो-ऑन के लिए आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया था। लेकिन सिलाव अंचलाधिकारी आकाशदीप सिन्हा द्वारा इस आदेश की अवहेलना किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

नागेंद्र प्रसाद सिंह ने 21 जुलाई 2025 को आवेदन संख्या पीजी 150/20250016859 के तहत मुख्य सचिव, बिहार सरकार को शिकायत दर्ज की थी। इस शिकायत में स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद सिंह के नाम पर संधारित पंजी-2 में कायम जमाबंदी संख्या-1 (मौजा माहुरी) और जमाबंदी संख्या-451 (मौजा मोहनपुर) के फॉलो-ऑन की मांग की गई थी।

इस शिकायत को राजस्व निगरानी सेल ने गंभीरता से लेते हुए नालंदा के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया।

एडीएम ने इस मामले को सिलाव के अंचलाधिकारी को भेजते हुए निर्देश दिया कि अंकित तथ्यों की जाँच कर 24 घंटे के भीतर सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जाए। यह आदेश स्पष्ट रूप से प्रशासनिक अनुशासन और त्वरित कार्रवाई को सुनिश्चित करने के लिए था।

विभागीय आदेश के बावजूद सिलाव अंचलाधिकारी आकाशदीप सिन्हा ने न तो जमाबंदी संख्या-1 (मौजा माहुरी) और न ही जमाबंदी संख्या-451 (मौजा मोहनपुर) के फॉलो-ऑन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस लापरवाही ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को बाधित किया, बल्कि आवेदक नागेंद्र प्रसाद सिंह के अधिकारों का भी हनन किया।

आवेदक ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पुनः मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अंचलाधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है। नागेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि अंचलाधिकारी की उदासीनता और आदेश की अवहेलना से उनकी शिकायत का समाधान नहीं हो सका, जिससे प्रशासन के प्रति उनका विश्वास डगमगा रहा है।

यह मामला न केवल सिलाव अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि बिहार सरकार के राजस्व विभाग और मुख्य सचिव के आदेशों की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जब उच्च स्तरीय आदेशों का पालन स्थानीय स्तर पर नहीं होता तो यह प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।

नागेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की लापरवाही से आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा कम होता है। उन्होंने मांग की है कि अंचलाधिकारी आकाशदीप सिन्हा के खिलाफ त्वरित विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

अब यह मामला राजस्व निगरानी सेल और मुख्य सचिव के कार्यालय के समक्ष पुनः विचाराधीन है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई न केवल आवेदक के हितों की रक्षा करेगी, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली में विश्वास को भी बहाल करेगी।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.