Friday, January 23, 2026
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    बेन में मानसून की बेरुखी से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं

    बेन (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के बेन प्रखंड में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से मानसून की बारिश नहीं होने से किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खेतों में तैयार धान के बिचड़े सूखने की कगार पर हैं और धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सावन के महीने में चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंता को और गहरा दिया है।

    इस वर्ष मानसून की बारिश उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है। जून में मानसून के आगमन के बावजूद अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जिसके चलते धान की रोपाई के लिए आवश्यक पानी की कमी बनी हुई है।

    बेन प्रखंड के किसान सलाहकार देवनारायण प्रसाद ने बताया कि जुलाई महीने में अब तक मात्र 137.8 एमएम बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इस समय तक लगभग 300 एमएम बारिश हो चुकी थी। यह कमी धान की खेती पर भारी पड़ रही है, जो इस क्षेत्र की मुख्य फसल है।

    प्रखंड में धान की रोपाई का लक्ष्य 7,138 हेक्टेयर निर्धारित किया गया था, जिसमें से अब तक केवल 4,233 हेक्टेयर में ही रोपाई हो पाई है। प्रखंड कृषि कार्यालय के समन्वयक ब्रज कुमार ने बताया कि बारिश की कमी के कारण रोपाई का कार्य ठीक से शुरू नहीं हो पाया है।

    बेन प्रखंड के कुछ हिस्सों में नहरों और नदियों की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इनमें भी पानी की भारी कमी है। नदियां सूखी पड़ी हैं और नहरों में पानी का अभाव किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। ऐसे में अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर हैं, क्योंकि पंपिंग सेट के सहारे धान की खेती करना सभी किसानों के लिए संभव नहीं है। कुछ संपन्न किसान पंपिंग सेटों का उपयोग कर रोपाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भी फसल को बचाने की चिंता सता रही है।

    लगातार बारिश न होने से सुखाड़ की आशंका बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि अगले चार-पांच दिनों में बारिश नहीं हुई तो रोपित फसल बर्बाद हो सकती है और उनकी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। तेज धूप और उमस ने न केवल किसानों, बल्कि आम लोगों के जनजीवन को भी प्रभावित किया है। आसमान में कभी-कभी बादल छाते हैं, लेकिन बारिश की संभावनाएं धराशायी हो रही हैं।

    किसानों का कहना है कि मानसून की बारिश के बिना धान की फसल का उत्पादन असंभव है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बारिश में भारी कमी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पिछले वर्ष 15 जुलाई तक 80% से अधिक धान की रोपाई पूरी हो चुकी थी, लेकिन इस वर्ष बारिश की कमी के कारण यह आंकड़ा काफी पीछे है।

    किसान और स्थानीय लोग बारिश की बाट जोह रहे हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर सभी की निगाहें टिकी हैं, लेकिन फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो न केवल धान की फसल, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

    Mukesh Bhartiyhttps://nalandadarpan.com/
    वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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