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ग्रामीणों का रोड नहीं तो वोट नहीं आंदोलन शुरु, चुनावी नेताओं पर कसा तंज

हिलसा (नालंदा दर्पण)। बिहार विधानसभा चुनाव-2025 की घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन हिलसा प्रखंड अंतर्गत कावा पंचायत के बड़की घोसी गांव के निवासियों ने विकास के झूठे वादों के खिलाफ कमर कस ली है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस गांव के लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद करते हुए जनप्रतिनिधियों को आड़े हाथों लिया।

ग्रामीणों ने बैठक कर गांव की समस्याओं पर चर्चा की और यह निर्णय लिया कि इस बार विधानसभा चुनाव में वोट का बहिष्कार करेंगे। अपनी मांगों के समर्थन में ग्रामीणों ने हिलसा-फतुहा मुख्य मार्ग पर लोहंडा बाजार में बैनर टांगकर रोड नहीं तो वोट नहीं का प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं के झूठे वादों के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि वे सूबे में चहुमुखी विकास का दावा करते नहीं थकते हैं। लेकिन उनके ही गृह जिले के कई गांव विकास से कोसों दूर हैं। बड़की घोसी गांव का उदाहरण देते हुए लोगों ने बताया कि आजादी के बाद से अब तक गांव में पक्की सड़क का सपना अधूरा है।

लोहंडा से सटे ग्वाल बिगहा से कमरथु गांव तक सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोग मुख्यालय तक पहुंचने के लिए 12 किलोमीटर की दूरी तय करने को मजबूर हैं। यह दूरी केवल पांच किलोमीटर रह सकती है। अगर सड़क का निर्माण हो जाए। सड़क के अभाव में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खाट पर ले जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में स्थिति और बदतर हो जाती है।

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चुनाव में सांसद और विधायक दोनों ने सड़क निर्माण का आश्वासन दिया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वादे से मुकर गए। विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि यह उनके वश की बात नहीं है। किसानों ने कृषि कार्य के लिए ट्रांसफार्मर की मांग भी की थी। लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं होता, तब तक वे वोट बहिष्कार के अपने फैसले पर अडिग रहेंगे। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बिजली के तार-पोल, ट्रांसफार्मर, गली-नाली की व्यवस्था समेत कई अन्य मांगें भी उठाईं।

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