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    चंडी पश्चिमी जिला परिषद सीट से अब तक पूर्ण विश्वास में क्यों नहीं आ रहे हैं प्रत्याशी ?

    नालंदा दर्पण डेस्क। सूरज की पहली किरण के पहले ही कैलेंडर की तारीख बदल जाती है। दिनांक 15 के बीच अब मात्र 4 दिन का अंतर शेष रहा है।

    जिला परिषद पश्चिमी सीट पर 13 प्रत्याशी कसरत कर रहें हैं। बाबजूद प्रत्याशी जनता में पूर्ण विश्वास में नजर नहीं आ रहें हैं।

    मतदाताओं के बीच वे बैठ बनाने में नाकाम दिख रहे हैं। दिन रात जनसंपर्क अभियान के बाद भी मतदान के पहले अंतिम रात का इंतज़ार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

    अंदरखाने एक वर्ग ऐसा भी है जो यह मानता है कि 2016  वाला खेल दोहराने के संकेत के रूप में जनता दिख रही है। लेकिन मतदाता अपनी राय इतनी जल्दी जाहिर करना नहीं चाहते हैं।

    चंडी प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के मतदान की तिथि नजदीक आ चुकी है।15 नबंबर को मतदान होना है।

    इस त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अपने पंचायत से ज्यादा मतदाताओं की नजर जिला परिषद पश्चिमी सीट पर है। यहां दिग्गजों की पत्नी चुनाव मैदान में हैं।

    सबसे बड़ी बात यह है कि यहां से दो पूर्व मुखिया की पत्नी भी चुनाव मैदान में हैं। तुलसीगढ़ पंचायत के पूर्व मुखिया कुमार चंद्र भूषण उर्फ भूषण मुखिया की पत्नी अनिता सिन्हा जिला परिषद सीट पर फिर से कब्जे को लेकर मैदान में हैं।

    वहीं महकार पंचायत से पूर्व मुखिया दिनेश कुमार की पत्नी जदयू की प्रदेश सचिव डॉ वसुंधरा कुमारी भी मैदान में हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनका पैर फिसल गया था। जिस कारण वह टूटे पैर के सहारे मैदान में डटी हुई है।

    जबकि इस बार बिल्कुल नया चेहरा पिंकी कुमारी भी मैदान में हैं।जो जाने-माने समाजसेवी प्रेम कुमार सिन्हा की पत्नी हैं।

    पिछले बार भी एक पिंकी कुमारी उम्मीदवार थी, जिसे हराकर अनिता सिन्हा ने चुनाव जीती थी। लेकिन इस बार पिंकी बनाम अनिता दोहराया जा सकता है या नहीं, फिलहाल अजमंश‌ की स्थिति है। इसका कारण मतदाताओं की चुप्पी है।

    जिला परिषद पश्चिमी सीट की एक और खासियत यह है कि यहां से चंडी के वरिष्ठ नेता सुखदेव प्रसाद की बहू नीशु कुमारी तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। पिछले दो बार से वह मामूली अंतर से चुनाव हार रही हैं।

    लेकिन इस बार उनकी स्थिति पहले से बेहतर बताई जा रही है।नीशू कुमारी का चुनाव प्रचार भी बिल्कुल चुप्पा अंदाज में चलता रहा है,न कोई ज्यादा शोर शराबा।

    चुनाव मैदान में सबसे ज्यादा पढ़ी पीएचडी धारक डॉ वसुंधरा कुमारी भी मैदान में अपनी उपस्थिति दिखाने में सफल रहीं हैं।

    वह 2010में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकीं हैं। फिलहाल वह जदयू की प्रदेश सचिव पद पर हैं।

    चुनाव प्रचार के दौरान उनका पैर फ्रैक्चर कर गया था।जिसके बाद से वह टूटी पैर की तस्वीर के साथ ही उनका चुनाव प्रचार चल रहा है।

    इनके अलावा रुबी देवी, स्नेहलता कुमारी,रेखा कुमारी, सहित 13 महिला उम्मीदवार जिला परिषद सदस्य बनने का सपना देख रहीं है।

    हालांकि अभी तक जनता के बीच प्रत्याशी पूर्ण विश्वास नहीं बना सकें हैं। सबकी अपनी डफ़ली अपना राग दिख रहा है। प्रेम कुमार सिन्हा की पत्नी पिंकी कुमारी हवा बनाने में लगी रहीं है।

    वैसे देखा जाएं तो फिलहाल मतदाताओं के बीच वह एक दमदार और अन्य प्रत्याशियों के लिए कड़ी टक्कर के रूप में उभरी है। लेकिन मतदाता अभी निर्णायक मूड में नहीं दिखते हैं।

    अनिता सिन्हा और निशु कुमारी भी उल्टफेर कर सकती हैं।नीशु कुमारी को इस बार ज्यादातर सहानूभूति वोट मिलता दिख रहा है।

    इसका कारण मतदाता ही जाहिर करते हैं कि वे तीन बार से लड़ाई लड़ रहीं है। उन्हें भी एक अवसर मिलना चाहिए। जिला परिषद चुनाव में धनबल के साथ जातिय गोलबंदी भी महत्वपूर्ण है।

    कुर्मी बाहुल्य इस सीट पर कुर्मी उम्मीदवार के बीच ही घमासान दिख रहा है।जबकि यादव और कहार वोटर भी अपने उम्मीदवार के लिए गोलबंद दिख रहें हैं।ऐसे में अन्य जातियों का वोट काफी निर्णायक साबित होने वाला है।

    चंडी प्रखंड जिला परिषद पश्चिमी सीट से इस बार धनबल हावी रहने की संभावना ज्यादा है।कहा जा रहा है कि जो जितना खर्च करेगा जिला परिषद सदस्य बनने की राह उनकी उतनी ही आसान होगी।

    चुनाव प्रचार समाप्त होने में 48 घंटे से भी कम समय बचा है। शनिवार शाम तक प्रत्याशियों को जितनी ताकत लगानी  होगी वह लगा चुके होंगे।

    लेकिन असली लड़ाई और खेला तो 13-14 की रात को होगी। जो प्रत्याशी जितना खर्च कर वोटरों को अपने पक्ष में गोलबंद करेगा जीत की ओर उसकी कदम बढ़ सकती है।

    फिलहाल मतदाताओं के बीच खामोशी है। उनकी खामोशी 15 नबंबर को ईवीएम में कैद होगी।जीत का सेहरा किनके सर बंधेगा इंतजार करना ही बेहतर होगा।

     

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