अब सरकारी भूमि के सत्यापन को लेकर नपेंगे अंचलाधिकारी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार में सरकारी भूमि के सत्यापन में हो रही देरी को लेकर अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सत्यापन कार्य में लापरवाही बरतने वाले अंचल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में विभाग के सचिव ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) को सत्यापन प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग करने का आदेश दिया है।

विभाग ने अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिला मुख्यालय से प्राप्त पत्रों को अलग से पंजी में दर्ज किया जाए। इन पत्रों का अवलोकन राजस्व कर्मचारियों से करवाने के साथ-साथ उनके हस्ताक्षर भी लिए जाएं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य विकास परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अब तक सत्यापन का जिम्मा मुख्य रूप से राजस्व कर्मचारियों पर था। लेकिन अब अंचल अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।

हाल ही में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की समीक्षा बैठक में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। बिहार में सरकारी जमीनों के करीब 26 लाख खेसरा की प्रविष्टि दर्ज की गई है। लेकिन अंचल अधिकारी स्तर पर केवल 22.61 प्रतिशत खेसरा का ही सत्यापन हो सका है। इस धीमी प्रगति के कारण कई बार जमीन विवाद की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। सत्यापन में देरी से विकास परियोजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। सत्यापन पूरा होने पर जमीन से संबंधित दावों का त्वरित निराकरण संभव हो सकेगा।

सूत्रों के अनुसार जिले में सरकारी जमीनों के सत्यापन का कार्य सबसे कम हुआ है। समीक्षा के दौरान भोजपुर के अपर समाहर्ता ने बताया कि राजस्व कर्मचारियों को इस प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण प्रगति धीमी रही। इसे सुधारने के लिए राजस्व कर्मचारियों और भूमि सुधार उप समाहर्ता द्वारा जांच के लिए रोस्टर तैयार किया गया है। सत्यापन के दौरान डाटा नोट फाउंड का संदेश प्रदर्शित हो रहा है। इसी तरह प्रायः अंचलों भी यही समस्या सामने आई है। इन तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए आईटी कोषांग को आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिया गया है।

सरकारी जमीनों का सत्यापन समय पर न होने से विकास परियोजनाओं में देरी हो रही है। कई बार ऐसी जमीनों पर अवैध कब्जे या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। जिससे परियोजनाओं का कार्य रुक जाता है। विभाग का मानना है कि सत्यापन प्रक्रिया को गति देने और अंचल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से इस समस्या का समाधान हो सकेगा।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों में सत्यापन कार्य को तेज करने के लिए कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। अंचल अधिकारियों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट जमा करने और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या को तुरंत उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया गया है।

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