Scam: संस्कृत स्कूलों में धड़ल्ले से हुई फर्जी बहाली, विभागीय जांच शुरू
अब चूंकि जांच टीम का गठन हो चुका है, आने वाले 15–20 दिन में जांच परिणाम आ सकते हैं। जांच के आधार पर फर्जी पाए गए शिक्षकों की नियुक्तियाँ निरस्त की जाएंगी। उन शिक्षकों से वेतन रिकवरी की प्रक्रिया आरंभ होगी...
बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। जिले के 13 संस्कृत उच्च एवं माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2024 में बिना किसी विज्ञापन और रोस्टर की प्रक्रिया का पालन किए ही शिक्षकों की फर्जी बहाली (Scam) कर दी गई है। इस घोटाले ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि विभागीय नियमावली 2015 के स्पष्ट दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए बहाली की कार्रवाई पिछले साल बैक डेट (2014) से दिखा दी गई।
मामला विधानसभा में भी उठा और विधायक राकेश कुमार रौशन ने इस्लामपुर व एकंगरसराय प्रखंडों के विद्यालयों में कथित फर्जी बहाली के विरुद्ध जांच एवं जवाबदेही की मांग की।
बिहार के संस्कृत विद्यालयों में नियुक्ति नियमावली 2015 को 2 फरवरी 2015 को प्रभावी किया गया था, जिसके तहत बहाली के लिए विज्ञापन जारी करना, वैकेंसी साफ करना और रोस्टर क्रम अनुसार चयन करना अनिवार्य था। मगर वर्ष 2024 में नालंदा ज़िले के 13 संस्कृत विद्यालयों में बिना किसी विज्ञापन और वैकेंसी के आधार के अभियोग के मुताबिक 2014 बैक डेट में 28 शिक्षकों की बहाली दिखा दी गई। इनमें से 13 शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष संदेह जताया जा रहा है। जबकि अन्य 15 नियुक्तियों की प्रक्रिया पारदर्शी होने के दावे किए गए हैं। इन 13 शिक्षकों का नियुक्ति अनुमोदन संस्कृत बोर्ड ने भी रद्दीली से 2024 में किया, जिससे पूरे प्रकरण की जांच की मांग और भी मुखर हो गई।
इस्लामपुर के विधायक राकेश कुमार रौशन ने विधानसभा में उपस्थित शिक्षा मंत्री एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 की नियुक्ति नियमावली के बगैर संस्कृत विद्यालयों में बहाली कैसे संभव हो सकी? यही नहीं, इन 13 बहाल शिक्षकों का वेतन तक जारी कर दिया गया, जबकि जांच तक भी कार्यवाही स्थगित नहीं की गई। रौशन ने जोर देकर कहा कि जांच के बिना वेतन जारी करने का मतलब दोषियों को संरक्षण देना है। उनके निर्देश पर डीईओ राज कुमार ने तत्काल जांच टीम गठित करने का आदेश जारी किया।
डीपीओ स्थापना नालंदा आनंद शंकर ने बताया कि जांच टीम की अध्यक्षता प्राथमिक शिक्षा के संयुक्त निदेशक अमर कुमार करेंगे, जबकि माध्यमिक शिक्षा के उप निदेशक संजय कुमार चौधरी और नरेंद्र कुमार सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।
डीईओ राज कुमार ने संबंधित जिला कार्यालयों एवं विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे जांच टीम को बहाली से संबंधित सभी अभिलेख, नियुक्ति आदेश, अनुमोदन फाइल, भुगतान रसीदें, शिक्षक से सम्बंधित दस्तावेज आदि उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विहित प्रपत्र में साक्ष्य सहित प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया निरस्त या आगे बढ़ेगी।
सूत्रों के अनुसार इन 13 शिक्षकों में से 10 शिक्षकों का एक माह का वेतन और एरियर का भुगतान पहले ही कर दिया गया है। जबकि अन्य तीन शिक्षक वैदिक साहित्य संस्कृत उच्च विद्यालय अतासराय के प्रधानाध्यापक प्रणव चंद तथा मुनक्का देवी एवं संस्कृत माध्यमिक विद्यालय कामता के प्रधानाध्यापक रवि प्रियदर्शी का वेतन 28 मार्च 2024 को रोक दिया गया।
उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई से पहले ही विभाग ने दोनों प्रधानाध्यापकों से आयकर संबंधित देनदारी भी वसूल ली थी। विभाग का दावा है कि इन दोनों मामलों में फर्जी बहाली के प्रमाण मिले थे, जिसके चलते भुगतान रोका गया।
वर्तमान में बताए जा रहे हैं कि शिक्षक शेष 8 माह का बकाया एरियर भी भुगतान होना बाकी है। हालांकि जांच पुष्ट होने के बाद ही यह राशि रिलीज की जाएगी। अटासराय व कामता के अतिरिक्त अलकनंदा उच्च विद्यालय, भास्कर संस्कृत मध्य विद्यालय तेल्हाड़ा और कुछ अन्य स्कूलों में भी बहाली संबंधी दस्तावेज की सत्यता पर प्रश्न उठ रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन 13 शिक्षकों की नियुक्ति पर संदेह है, उनमें वैदिक साहित्य संस्कृत विद्यालय अतासराय- प्रणव चंद (एचएम), मुनक्का देवी (संस्कृत माध्यमिक विद्यालय कामता), ब्रह्मर संस्कृत प्रा. हम विद्यालय सरथा- सौरभ कुमार, नारी ज्ञान भारती बालिका संस्कृत उवि भारती, ग्राम भोभी- सुमंत कुमार कश्यप एवं विद्या सागर, संस्कृत प्रा. विद्यालय दरियापुर नगरनौसा- उषा कुमारी, संस्कृत प्रावि यारपुर बलवा- सविता कुमारी, अवध संस्कृत मवि राजगीर- दुर्गेश उपाध्याय तथा अन्य चार शिक्षक, जिनके दस्तावेज़ स्थानीय स्तर पर खरे नहीं उतर रहे।
इन नियुक्तियों में वर्ष 2014 के बैक डेट में बहाली का दस्तावेज बनाया गया। फिर संस्कृत बोर्ड द्वारा वर्ष 2024 में अनुमोदन जारी हुआ। एक माह का वेतन (मार्च 2024) नियमानुसार भुगतान किया जा चुका है, जबकि 8 माह का एरियर लंबित है।
डीपीओ स्थापना नालंदा आनंद शंकर ने स्पष्ट कहा है कि संस्कृत विद्यालयों में नियमानुसार बहाली नहीं किए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इसलिए जिले के सभी संस्कृत उच्च एवं मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने विद्यालय में नियुक्त सभी शिक्षकों की संपूर्ण विवरणी, साक्ष्य सहित जांच टीम को उपलब्ध कराएं। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेतन भुगतान की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। यदि कोई शिक्षक फर्जी पाया गया तो तत्काल सेवा समाप्ति तथा रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
जांच टीम प्राथमिक शिक्षा निदेशालय से जुड़े शैक्षिक दस्तावेज़ों की पृष्ठभूमि और आवेदन-पत्रों की सत्यता का आकलन करेगी। इसके अलावा स्कूलों के स्थानीय रिकॉर्ड- उदाहरण के लिए प्राचार्य के हस्ताक्षर, विद्यालय समिति की बैठक के मिनट्स, सत्यापन रिपोर्ट, द्वितीयक विद्यालय जिला कार्यालय की अनुशंसाओं का अध्ययन किया जाएगा।
बिहार संस्कृत माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व सचिव विद्या सागर ने बताया कि उन्होंने डीडीसी एवं डीएम कार्यालय के साथ-साथ शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से भी शिकायत भेजी है। इन 13 स्कूलों में कुल 28 शिक्षकों के पदों पर बहाली हुई थी, जिनमें से 13 बहालियों की जांच चल रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 10 शिक्षकों को बिना शोध-पत्रावली जांच के ही वेतन जारी कर दिया गया। ऐसे में कई शिक्षकों का भविष्य अनिश्चय में है, और अन्य निष्पक्ष बहालियों पर भी संदेह का बादल मंडरा रहा है।
विद्या सागर आगे कहते हैं कि कई शिक्षकों को नियुक्ति पेपर प्रस्तुत करने के लिए कहा गया, लेकिन अधिकांश के पास वैलिडिटी से संबंधित प्रमाण ही नहीं थे। विभाग की इस लापरवाही ने शिक्षा के प्रति हमारे विश्वास को झकझोरा है। जांच कारगर नहीं हुई तो व्यापक आंदोलन की चेतावनी हम पहले ही दे चुके हैं।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी पाए गए अधिकारियों तथा शिक्षकों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो जिले भर के संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक सामने आएंगे।
अब चूंकि जांच टीम का गठन हो चुका है, आने वाले 15–20 दिन में जांच परिणाम आ सकते हैं। जांच के आधार पर फर्जी पाए गए शिक्षकों की नियुक्तियाँ निरस्त की जाएंगी। जिन शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया था, उनके मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अन्य 10 शिक्षकों से वेतन रिकवरी की प्रक्रिया आरंभ होगी। यदि वे फर्जी पाए गए तो शिक्षाकोत्तर अधिकारियों तथा जिला स्तर के अफसरों की भी जवाबदेही तय होगी, जो इन गैरकानूनी बहालियों को नजरअंदाज करते रहे।





