राजगीर (नालंदा दर्पण)। जैन तीर्थ सिद्ध क्षेत्र अवस्थित राजगीर दिगंबर जैन धर्मशाला में घटित हृदयविदारक घटना का अंत रविवार को चारों मृतकों के अंतिम संस्कार के साथ हो गया। बेंगलुरु से आए जैन तीर्थयात्रियों के चार सदस्य तीन महिलाएं और एक पुरुष का अंतिम संस्कार पटना के गुबली घाट पर परिजनों की मौजूदगी में धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान परिजनों का दुख, मौन और संयम पूरे माहौल को भावुक बना रहा।
मृतकों की पहचान बेंगलुरु निवासी जीआर सुमंगला (78 वर्ष), शिल्पा जीआर (48 वर्ष), श्रुथा जीबी (43 वर्ष) तथा जीआर नागा प्रसाद (50 वर्ष) के रूप में हुई है। अंतिम संस्कार के समय मृतकों के चाचा जीएन ब्रुसुब्बा राजु, चचेरी बहन सम्याकथवा जैन डी तथा पड़ोसी रोहित बीभी उपस्थित रहे। सभी परिजन कर्नाटक के तामकुर जिला अंतर्गत बैलेडा पेटे, गुब्बी (ग्रामीण) के निवासी हैं।
पुलिस प्रशासन की ओर से डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने परिजनों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतकों के पास से बरामद एक लाख 18 हजार रुपये नकद तथा महिलाओं के आभूषणों को परिजनों ने राजगीर स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला को दान कर दिया है। इसके साथ ही धर्मशाला में कमरा बुकिंग के दौरान जमा किए गए चार हजार रुपये भी दान स्वरूप सौंप दिए गए हैं।
परिजनों ने यह भी जानकारी दी कि मृतक जीआर नागा प्रसाद के गांव में लगभग चार एकड़ भूमि है, जिसमें से एक प्लॉट पहले ही बेचा जा चुका है। शेष भूमि को भी दिगंबर जैन धर्मशाला के नाम दान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसे मृतकों की धार्मिक आस्था और अंतिम इच्छा से जोड़कर देखा जा रहा है।
इधर, परिजनों ने शव बरामदगी के समय कराई गई वीडियोग्राफी की मांग पुलिस से की है। पुलिस प्रशासन ने जांच प्रक्रिया के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। साथ ही परिजनों ने पुलिस प्रशासन द्वारा पूरे मामले में दिए गए सहयोग की सराहना करते हुए आभार भी व्यक्त किया।
गौरतलब है कि शनिवार को दिगंबर जैन धर्मशाला, राजगीर के कमरा संख्या 6 एबी से चार शव बरामद किए गए थे, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रारंभिक स्तर पर बेंगलुरु जाकर जांच के लिए गिरियक अंचल पुलिस निरीक्षक सुमंत कुमार और राजगीर के अनि भानु प्रताप सिंह को भेजने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन पुलिस जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाने के बाद इस पर विराम लगा दिया गया।
डीएसपी ने बताया कि परिजनों की सहमति से मृतकों के कपड़ों को नष्ट करने की स्वीकृति भी दे दी गई है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि इस दुखद घटना के पीछे पारिवारिक कलह, आपसी तालमेल की कमी, पूर्व में घटित एक पारिवारिक हत्या का मामला, न्यायालय में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया, मानसिक असंतुलन और बेरोजगारी जैसे कई कारण जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार जीआर नागा प्रसाद बेंगलुरु में अपनी मां और दो बहनों के साथ रहते थे, जबकि गांव में उनका आना-जाना बहुत कम था। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और पुलिस प्रशासन ने इस मामले को समाप्त मान लिया है।
राजगीर की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक यात्रा पर आए लोगों के जीवन में छिपे मानसिक और पारिवारिक तनाव कितने गहरे हो सकते हैं। फिलहाल अंतिम संस्कार और दान की प्रक्रिया के साथ इस दर्दनाक अध्याय पर विराम लग गया है, लेकिन पीछे रह गई है एक परिवार की कभी न भरने वाली पीड़ा।
स्रोतः मीडिया रिपोर्टस् और नालंदा दर्पण डेस्क के लिए मुकेश भारतीय।













