थानेदार के वेतन से 4 हजार रुपए बिहार किशोर न्याय निधि में जमा करने का आदेश

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण )। जिला किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्रा ने  एक हत्यारोपी किशोर का एसबीआर नहीं सौंपे जाने पर बिंद थाना प्रभारी सह मामले के अनुसंधानकर्ता अभय कुमार के वेतन से 4 हजार रुपये वाद स्थगन के खर्च के रूप में काटकर बिहार किशोर न्याय निधि में जमा करने के आदेश दिये हैं।

आदेश की कॉपी एसपी के अलावा ट्रेजरी ऑफिसर को भी भेजी गयी है। उक्त किशोर न्यायिक अभिरक्षा में है। थाना प्रभारी द्वारा किशोर की सामाजिक पृष्ठिभूमि रिपोर्ट नहीं सौंपने के कारण अब तक चार बार सुनवाई टल गयी है।

किशोर न्याय परिषद ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक हजार रुपए प्रति सुनवाई की दर से दंड आरोपित किया गया है। यदि आगे भी थाना प्रभारी की लापरवाही के कारण सुनवाई टली तो प्रति सुनवाई एक हजार रुपये की कटौती उनके वेतन से होगी।

जज मिश्र ने अपने आदेश में कहा है कि किशोर न्याय अधिनियम के अनुसार एसबीआर रिपोर्ट बालक को पहली बार बोर्ड में प्रस्तुत करते समय ही देनी चाहिए थी। लेकिन बार-बार मांगने के बावजूद नहीं दिया गया है। उन्हें लिखित और मोबाइल पर इसकी अलग-अलग तिथियों में सूचना दी गयी थी। रिपोर्ट के अभाव में किशोर के जमानत आवेदन पर चार तिथियों से सुनवाई नहीं हो पा रही है। जिसे जेजेबी ने काफी गंभीर माना है।

आदेश में बिहार किशोर न्याय निधि के अकाउंट नम्बर भी दिये गये हैं। राशि जमा हुई या नहीं इसकी सूचना जेजेबी को देनी होगी। इस धारा के तहत जिस पक्षकार के कारण वाद के निष्पादन में देरी हो उस पर अर्थदंड लगाया जा सकता है। अनुसंधानकर्ता ने हत्या जैसे जघन्य अपराध में भी अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया है।

इन बिन्दुओं पर मांगी गयी थी रिपोर्टः

  • किशोर पूर्व से अपराध से जुड़ा है या प्रथम अपराध है अथवा किस कारणवश यह अपराध करने में संलग्न है?
  • परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है?
  • किशोर को नशा, व्यसन, जुआ आदि की आदत है या नहीं?
  • क्या किशोर स्कूल छोड़ चुका है?
  • क्या किशोर के घर-परिवार का कोई व्यस्क अपराधी है जिससे प्रभावित होकर अपराध में शामिल हो गया?
  • क्या किशोर का दुरुपयोग अपराधियों के गैंग द्वारा किया जा रहा है?

इसके आलावे किशोर न्याय परिषद द्वारा आरोपी किशोर के जीवन में सुधार के लिए सुझाव भी बाल कल्याण पदाधिकारी से मांगे गये थे।

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