राजगीर भेलवा जलाशय की उड़ाही में अनदेखी, ब्रह्मकुंड सुखने से हड़कंप

राजगीर (नालंदा दर्पण)। पर्यटक शहर राजगीर के वैभारगिरी पहाड़ी पर के भेलवा डोभ जलाशय से ब्रह्मकुंड क्षेत्र के झरनों और कुंड़ों के तार जुड़े हैं। इतने महत्वपूर्ण होने के बाद भी वह जलाशय उपेक्षा का शिकार है। यही कारण है कि करीब एक दसक से यह जलाशय सूखा है। इसका प्रतिकूल प्रभाव ब्रह्मकुंड क्षेत्र के गर्मजल के झरनों और कुंडों पर पड़ रहा है।

rajgir-paryatak-thana-kund-over-crime-3स्थानीय लोगों की माने तो झरनों के जलप्रवाह की आवाज करीब एक किलोमीटर दूर से सुनी जाती थी। उस समय भेलवा डोभ जलाशय में सालों अथाह पानी रहता था। लेकिन कालांतर में वह सब इतिहास बन गया है। अब न तो भेलवा डोभ जलाशय में पानी रहता है और न ही गर्मजल के बाहर निकलती है।

प्रकृति द्वारा जल जीवन हरियाली योजना से राजगीर के ‘भेलवाडोभ’ जलाशय की खुदाई एवं उड़ाई कराने की गुहार सीएम और डीएम से छह साल पहले की गयी थी।

प्रकृति द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नालंदा जिला पदाधिकारी को संबोधित ज्ञापन में कहा गया था कि राजगीर के वैभारगिरी पहाड़ी पर ‘भेलवाडोभ’ प्राकृतिक विशाल जलाशय है। यह तीन तरफ पहाड़ियों से घिरा है।

इस जलाशय में पहले अथाह जल संग्रह होता था। हाथी डूबने से अधिक पानी सालों रहता था। लेकिन अब इसका अस्तित्व संकट में है। यह अब सालों सूखा रहता है। वह गाद से भर कर नदियों, आहर और पोखर की तरह संकीर्ण और उथला हो गया है। इसमें अब पहले जैसा पानी संग्रह नहीं हो पाता है। वर्षा ऋतु में भी पानी नहीं संग्रह हो पाता है।

यही कारण है कि अन्य जलाशयों की तरह यह सालों सूखा रहता है। सीएम और डीएम को ज्ञापन सौंपने के बाद भी भेलवा डोभ जलाशय की पर्याप्त खुदाई- उड़ाही नहीं हो रही है।

ज्ञापन के अनुसार इस जलाशय का तार राजगीर के सुप्रसिद्ध गर्मजल के कुंडों से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी जलाशय से रिस-रिस कर पानी गर्मजल के कुंडों और झरनों तक जाती है। इसके सूखने का असर कुंड की धाराओं पर पड़ने लगा है। गर्मजल के तीन कुंडों के झरने महीनों से सूखे हैं। चौथा कुंड मार्कण्डेय भी किसी दिन सूख सकता है।

पहले की तरह गर्मजल के झरनों की धारा अब नहीं बहती है। इसमें बहुत गिरावट आई है। इस प्राकृतिक जलाशय के सूखने से धर्म और संस्कृति प्रेमियों के मन में तरह-तरह की आशंकाएं उमड़ घुमड़ रही है।

‘प्रकृति’ के अध्यक्ष नवेन्दू झा और सचिव ने ज्ञापन में कहा है कि यह जलाशय वर्षों से सालों सूखा रहता है। जलाशय में केवल दरारें ही दरारें हैं। इस जलाशय का सूखना राजगीर के इस सांस्कृतिक धरोहर के लिए भयावह संदेश से कम नहीं है।

भेलवा डोभ जलाशय के लगातार सूखे रहने से गर्मजल के कुंडों- झरनों की धाराओं पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने लगा है। एक के बाद एक झरनों और कुंडों के सूखने से राजगीर के बुद्धिजीवियों और संस्कृति प्रेमियों की निंद हराम हो गयी है।

2023 में संपन्न राजगीर के ऐतिहासिक मलमास मेला के दौरान भी दो कुंड बन्द रहे थे। जानकर कहते हैं कि अभी कुंडों और गर्मजल के झरनों की हालत ऐसी है तो मई-जून के महीने में कैसा रहेगा। यहां के गर्मजल के कुंडों में जल संकट न हो इसके लिए इसकी खुदाई बहुत आवश्यक है।

‘प्रकृति’ने राजगीर की अनमोल सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के लिए वर्षा ऋतु के पहले इसकी खुदाई और उड़ाही कराने पर जोर दिया है। फिलहाल इस जलाशय की खुदाई और उड़ाही वन विभाग द्वारा करीब दो दर्जन श्रमिकों के सहारे की जा रही है, जो महज औपचारिकता भर प्रतीत होता है।

ज्ञापन में जलाशय के अस्तित्व को पुनर्जीवित करने के लिए जेसीबी मशीन से खुदाई और उड़ाही कराने का सुझाव दिया गया है। जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर को जलाशय तक पहुंचाने के लिए सेना के हेलीकॉप्टर का सहारा लेने का सुझाव दिया गया है।

जलाशय की पर्याप्त खुदाई और उड़ाही होने से राजगीर के इस पौराणिक सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा तो होगी ही। वैभारगिरी पहाड़ी पर के पेड़ पौधों और पशु-पक्षियों के लिए वरदान साबित हो सकेगा। इसके साथ ही सदा के लिए गर्मजल के कुंडों और झरनों को जल संकट से मुक्ति मिल सकती है।

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