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अब अस्पतालों में दीदी की रसोई के साथ दीदी की सफाई भी देखने को मिलेगी

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। अबतक सरकारी अस्पतालों में दीदी की रसोई से रोगियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था। अब उन अस्पतालों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी जीविका दीदियां ही उठाएंगी। फिलहाल बिहारशरीफ के अलावा राजगीर और हिलसा अनुमंडलीय अस्पतालों की जिम्मेदारी उन्हें दी गयी है। अन्य अस्पतालों में पहले की तरह ही एजेंसी द्वारा ही सफाई करायी जाएगी।

बता दें कि नालंदा जिले के सभी प्राथमिक, सामुदायिक, रेफरल, अनुमंडलीय व सदर अस्पतालों की साफ-सफाई का जिम्मा दो निजी एजेंसियां देख रही हैं। इसके माध्यम से लगभग 300 सफाई कर्मी रोजाना रोस्टर के अनुसार काम करते हैं।

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम श्याम कुमार निर्मल के अनुसार एक अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होने की संभावना है। इसकी तैयारी चल रही है। दीदियों की मॉनिटरिंग एवं भूगतान का पूरा जिम्मा जीविका ही देखेगी। जबकि, साफ-सफाई की मॉनिटरिंग का जिम्मा अस्पताल प्रबंधन के पास रहेगा।

जीविका के युवा पेशेवर अमित वैभव के अनुसार इसके लिए दीदियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक बैच में नालंदा जिला की दर्जनभर दीदियों को हाजीपुर में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

संस्थान की आवश्यकता के अनुसार उन्हें सफाई रखने की तकनीकी जानकारी दी जाती है। पांच फरवरी को जीविका व स्वास्थ्य विभाग के बीच इसके लिए सहमति बनी है। इस संबंध में अभी पत्र नहीं मिला है। इसकी तैयारी चल रही है। हम इसके लिए तैयार हैं। पत्र मिलते ही दीदियों को वहां लगा दिया जाएगा।

जीविका के संचार प्रबंधक संतोष कुमार के अनुसार स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अब हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रही हैं। गैर कृषि थीम पर काम किया जा रहा है। दीदी की रसोई, साफ-सफाई, वन स्टेप फैसिलिटी सेंटर, सरस मेला, मधुमक्खी पालन इसी थीम के अंतर्गत आता है। इसके माध्यम से भी दीदियों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

जीविका दीदियां फिलहाल जिले में सात जगहों पर दीदी की रसोई की सेवा दे रही हैं। सदर, राजगीर, हिलसा अस्पताल के साथ ही पावापुरी मेडिकल कॉलेज में रोगियों का भोजन-पानी का इंतजाम उनके हवाले है।

इसी तरह राजगीर बालिका आम्बेडकर हाई स्कूल में 400 छात्राओं तो मुढ़ारी बालक आंबेडकर हाई स्कूल चंडी में 200 छात्रों को भोजन उपलब्ध करा रही हैं। साथ ही, वहां की साफ-सफाई भी कर रही हैं। इसके अलावा टाउन हॉल परिसर में दीदी कैफेटेरिया में लोगों को सेवा दे रही हैं। इन केंद्रों पर लगभग ढाई सौ दीदियों को रोजगार मिला हुआ है।

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मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »
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