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राजगीर की पंच पहाड़ियां भी उगल रही आग, जानें पर्यटकों का हाल

नालंदा दर्पण डेस्क। मनोरम पंच पहाड़ियों से घिरे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल राजगीर और उसके आसपास में भीषण गर्मी पड़ रही है। नौतपा के पांचवे दिन इस पर्यटक नगर में भीषण गर्मी में लोग अच्छे खासे परेशान रहे।

इन दिनों भीषण गर्मी के कारण पिछले छह साल का रिकार्ड टूटा है। चिलचिलाती धूप के बीच ऐसा महसूस हो रहा है, मानो आसमान से आग की बारिश हो रही हो। तेज धूप से शरीर में जलन का अहसास हो रहा है। जो जहां है वहीं परेशान है।

समूचे राजगीर में राजस्थान जैसी गर्मी की लहर का अहसास हो रहा है। तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि से लोग चिंतित है। शहर में पहुंचे पर्यटक भी गर्मी के कारण बेहाल हैं। वे दिन में ठीक से नहीं घूम पा रहे हैं। शहर की सड़कें और पर्यटन स्थल वीरान लग रहे हैं।

वहीं राजगीर की पहाड़ियों पर बड़े छायेदार वृक्षों की होती कमी काफी खल रही है। वन क्षेत्र लगातार सिकुड़ती जा रही है। आबादी तेजी से बढ़ती जा रही है। पहाड़ियों पर छायादार पेड़ पौधारोपण नहीं होना और ग्लोबल वार्मिंग आदि के कारण लगातार तापमान बढ़ने का प्रमुख कारण है।

लोगों की मानें तो पहले भी गर्मी पड़ती थी, लेकिन इतनी अधिक गर्मी नहीं पड़ती थी। अभी तापमान आसमान की तरफ चढ़ता दिख रहा है। दिन में भीषण गर्मी के कारण सड़कें सुनसान रहती है। छांव देने के लिए छायादार वृक्ष भी कहीं नहीं दिखतीं है।

राजगीर पंच पहाड़ियों के लिए मशहूर है। लेकिन यहां की पहाड़ियों पर बरगद, पीपल, नीम, गूलड़ आदि छायादार-वृक्ष खोजने पर भी नहीं मिलते हैं। सबसे बड़ा कारण जंगल और पहाड़ियों पर बड़े और छायादार पेड़ों का नहीं होना और राजगीर का कंक्रीट के शहर में तब्दील होना भी है।

पहले यहां के पहाड़ियों पर बड़ी संख्या में छायादार पेड़ होते थे। अब खोजने पर भी नहीं मिलते हैं। यह राजगीर के हित में नहीं है। हालांकि पहले भी भीषण गर्मी पड़ने का रिकॉर्ड रहा है। लेकिन राजगीर में आज की तरह गर्मी कभी नहीं पड़ी। गर्मी के पीछे सबसे बड़ा कारण बरगद, पीपल, नीम जैसे बड़े पेड़ों का नहीं होना है।

यहां वन क्षेत्र हो या पहाड़ियां पौधारोपण। उसके के नाम पर हर जगह सिर्फ खानापूर्ति हो रहे हैं। निर्माण के नाम पर बड़े पेड़ कट रहे हैं, लेकिन छोटे पौधे भी उस अनुपात में नहीं लग रहे हैं। छोटा पौधा देखभाल के अभाव में कब बड़ा होगा, उसकी भी कोई गारंटी नहीं है।

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Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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