Friday, January 23, 2026
अन्य

    लॉकडाउन में 55 हजार हर महीना ब्याज पर 5 लाख का कर्ज खा गई 5 जिंदगियां

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण) नालंदा जिला अंतर्गत भगवान महावीर की पावन महानिर्वाण स्थल पावापुरी में एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लॉकडाउन के कर्ज के बोझ तले दबे एक परिवार के पांच सदस्यों ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

    इस घटना में धर्मेंद्र कुमार (42), उनकी पत्नी सोनी कुमारी (38), दो बेटियों दीपा (16) और अरिमा कुमारी (14) और बेटे शिवम (14) की मौत हो गई। यह परिवार आर्थिक तंगी और सूदखोरों के दबाव से इस कदर परेशान था कि उसने आत्महत्या को ही अंतिम रास्ता मान लिया।

    धर्मेंद्र ने शिकारपुर गांव के अजय उर्फ रामू से 3 लाख रुपये और पावापुरी के दशरथपुर गांव के धर्मेंद्र कुमार से 2 लाख रुपये का कर्ज लिया था। कुल 5 लाख रुपये के इस कर्ज पर 10 प्रतिशत की भारी ब्याज दर के हिसाब से हर महीने 55 हजार रुपये की किस्त चुकानी थी। शुरुआती दो महीनों तक धर्मेंद्र ने ब्याज का भुगतान किया, लेकिन परिवार के बढ़ते खर्चों और सीमित आय के कारण यह बोझ असहनीय हो गया।

    धर्मेंद्र के परिवार में चार बच्चे थे, जिनकी पढ़ाई पर हर महीने करीब 10 हजार रुपये खर्च होते थे। इसके अलावा किराए के मकान का 3 हजार रुपये और कपड़े की दुकान का 5 हजार रुपये किराया देना पड़ता था। घर के अन्य खर्चों को मिलाकर धर्मेंद्र को हर महीने 70-80 हजार रुपये की जरूरत थी, जो उनकी आय से कहीं अधिक थी। उनकी कपड़े की दुकान भी घाटे में चल रही थी। जिससे आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई।

    जब धर्मेंद्र ब्याज का भुगतान नहीं कर पाए तो सूदखोरों ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया। पड़ोसियों के अनुसार सूदखोरों ने न केवल धर्मेंद्र पर पैसे लौटाने का दबाव बनाया, बल्कि उनकी पत्नी सोनी कुमारी के साथ भी बदसलूकी की। इस अपमान और लगातार तनाव ने धर्मेंद्र को इस हद तक तोड़ दिया कि उन्होंने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने का फैसला कर लिया।

    शुक्रवार की शाम को धर्मेंद्र अपनी पत्नी सोनी, दोनों बेटियों दीपा और अरिमा , दो बेटों शिवम और सत्यम के साथ पावापुरी के मां काली मंदिर पहुंचे। गांव वालों के अनुसार धर्मेंद्र ने अपनी पत्नी से पहले ही इस योजना पर चर्चा कर ली थी। मंदिर में पूजा करने और प्रसाद चढ़ाने के बाद धर्मेंद्र ने एक बाबा से और कर्ज दिलाने की गुहार लगाई। लेकिन बाबा ने इन्कार कर दिया। इसके बाद धर्मेंद्र ने बाजार से 70 रुपये में सल्फास की 10 गोलियां खरीदीं।

    उन्होंने इन गोलियों को प्रसाद में मिलाकर पहले सोनी, फिर दीपा, अरिमा और शिवम को खिला दिया। सबसे छोटे बेटे सत्यम को भी गोली दी गई। लेकिन उसने इसे तुरंत नहीं खाया और स्थिति को भांपकर प्रसाद जमीन पर गिरा दिया। कुछ ही मिनटों में परिवार के सदस्यों की हालत बिगड़ने लगी और वे तड़पने लगे।

    सोनी कुमारी ने अपनी हालत बिगड़ने से पहले बादशाह कोचिंग सेंटर के संचालक मधुरंजन को फोन कर घटना की जानकारी दी और सत्यम की देखभाल करने को कहा। मधुरंजन तुरंत मौके पर पहुंचे और सभी को अस्पताल ले गए।

    लेकिन पटना के पीएमसीएच में इलाज के दौरान शुक्रवार रात दीपा और अरिमा की मौत हो गई। देर रात सोनी और शिवम ने भी दम तोड़ दिया। शनिवार देर रात धर्मेंद्र की भी मौत हो गई। सत्यम इस हादसे में इकलौता जीवित बचा।

    धर्मेंद्र का पैतृक गांव शेखपुरा जिले का पुरनकामा है, जहां उनके पिता की आठ साल पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद से धर्मेंद्र कभी गांव नहीं लौटे और उनका पैतृक घर खंडहर में तब्दील हो चुका है।

    पड़ोसियों के अनुसार धर्मेंद्र ने दिल्ली में कुछ समय तक ऑटो चलाया और फिर नालंदा जिले के बरहोग गांव की सोनी कुमारी से शादी की। शादी के बाद वे पटना में राजमिस्त्री का काम करने लगे और बाद में पावापुरी में कपड़े की दुकान खोली, जो घाटे में चली।

    शनिवार को नालंदा के एसपी भारत सोनी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। पुलिस ने धर्मेंद्र के बयान में उल्लिखित सूदखोरों अजय उर्फ रामू और धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ जांच शुरू कर दी है।

    उधर मॉडल अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद सोनी और उनके तीन बच्चों के शव उनके मायके बरहोग गांव ले जाए गए। वहां से शवों को बाढ़ के उमानाथ घाट ले जाया गया, जहां सत्यम ने अपनी मां, भाई और दोनों बहनों को मुखाग्नि दी।

    इधर, नालंदा एसपी भारत सोनी ने घटनास्थल का दौरा कर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस ने धर्मेंद्र के बयान के आधार पर कर्ज देने वालों अजय उर्फ रामू और धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ जांच शुरू की है।

    बहरहाल, यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज में बढ़ते कर्ज और सूदखोरी के दुष्परिणामों की एक कड़वी सच्चाई को भी उजागर करती है। धर्मेंद्र और उनके परिवार की यह कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव लोगों को कितना असहाय बना सकते हैं। इस दुखद घटना के बाद प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

    Mukesh Bhartiyhttps://nalandadarpan.com/
    वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.