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बदहाल सफाई व्यवस्था से बेन बाजार के चौक-चौराहों पर गंदगी का अंबार

बेन (नालंदा दर्पण)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों और बाजारों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के दावे भले ही किए जा रहे हों, लेकिन बेन प्रखंड का बाजार और कई वार्ड आज भी बदहाल सफाई व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहे हैं। चौक-चौराहों, मुख्य सड़कों और गलियों में जगह-जगह फैले कचरे के ढेर न केवल बाजार की सूरत बिगाड़ रहे हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।

बाजार के विभिन्न हिस्सों में खुलेआम कूड़ा फेंके जाने से दुर्गंध और प्रदूषण का वातावरण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय पहले वार्डों से नियमित कचरा उठाव के लिए अभियान शुरू किया गया था, लेकिन वह कुछ ही दिनों में बंद हो गया। कचरा संग्रहण की व्यवस्था ठप पड़ने के बाद लोग मजबूरी या लापरवाही में जहां-तहां कूड़ा फेंक रहे हैं।

सबसे अधिक परेशानी बेन बाजार के पटेल चौक तथा मध्य सह उच्च माध्यमिक विद्यालय के पास मुख्य सड़क से मांड़ी जाने वाले मार्ग पर देखी जा रही है। सड़क किनारे जमा कचरे के ढेर से राहगीरों और दुकानदारों को रोजाना दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आसपास के कुछ दुकानदार मुर्गा, मछली और बकरे की बिक्री के बाद उनके पंख, हड्डियां और अन्य अपशिष्ट भी खुले में फेंक देते हैं, जिससे गंदगी और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।

विडंबना यह है कि इसी मार्ग पर बीआरसी कार्यालय, बालिका कस्तूरबा विद्यालय, मवेशी अस्पताल, महिला सिलाई प्रशिक्षण केंद्र और वस्त्र उत्पादन केंद्र जैसे महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था की अनदेखी से यहां आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और आम नागरिकों को नारकीय हालात का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में बनाए गए कचरा संग्रहण केंद्र, कूड़ेदान और अन्य सफाई संसाधन अब उपयोग में नहीं हैं। नियमित कचरा उठाव नहीं होने के कारण सार्वजनिक स्थान ही कचरा फेंकने की जगह बनते जा रहे हैं। उनका आरोप है कि साफ-सफाई के नाम पर सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रखंड प्रशासन से तत्काल सफाई व्यवस्था बहाल करने, नियमित कचरा उठाव सुनिश्चित करने तथा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा और अधिक बढ़ सकता है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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