नालंदा DEO ऑफिस के घूसखोर क्लर्क को 2 साल की सश्रम सज़ा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। पटना की एक विशेष अदालत ने सोमवार को नालंदा जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) के एक लिपिक को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। विशेष निगरानी न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत यह फैसला सुनाया है।

दोषी नालंदा जिला शिक्षा कार्यालय के पूर्व लिपिक राज किशोर सिन्हा को एक प्रखंड शिक्षक और उनके सात सहयोगी शिक्षकों के बकाया वेतन का भुगतान करने के एवज में 1600 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। विशेष लोक अभियोजक विजय भानू ने बताया कि निगरानी विभाग ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सिन्हा को गिरफ्तार किया था।

अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा करने में विफल रहता है तो उसे एक माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर सिन्हा की रिश्वतखोरी को साबित किया।

यह मामला नालंदा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, जहां निगरानी विभाग द्वारा समय-समय पर ऐसी कार्रवाइयां की जाती रही हैं। इस फैसले से सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत संदेश गया है। स्थानीय शिक्षकों और कर्मचारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

इस संबंध में निगरानी विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करेंगे। ताकि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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