चंडी प्रखंड में पंचायत चुनाव के कुल 1333 प्रत्याशियों के लिए आज कयामत की रात

नालंदा दर्पण डेस्क। चंडी प्रखंड में पंचायतों के 1333 प्रत्याशियों के लिए आज कयामत की रात है। बुधवार की सुबह एक नई किरण लेकर आने वाली है। बुधवार की सुबह चंडी प्रखंड के पंचायतों के लिए एक नयी सुबह होगी।

पंचायतों में किसकी कुर्सी बचेगी,कौन हारेगा चुनाव नतीजे आएंगे तो तस्वीर साफ हो जाएगी। लेकिन पहले मंगलवार की रात तो गुजर जाए। आज की रात चंडी प्रखंड के 13 पंचायतों के 1333 उम्मीदवारों के लिए किसी कयामत की रात से कम नहीं है।

कम-से-कम आज की रात तो प्रत्याशियों को नींद आने वाली नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि आज की रात सबसे ज्यादा भारी है। शायद सबसे ज्यादा करवटें बदलने को मजबूर कर दें ये रात,नींद भी बीच-बीच में उचट आएं। शायद खुली आंखों और बेचैनी में ही रात गुजर जाएं।

मतदाताओं को भी इंतजार रहेगा कि उनके पंचायत में अगले पांच साल की सूरत क्या होगी। लेकिन नतीजे के बीच खड़ी है‌ कई घंटे की रात।

चंडी प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मतदान काफी उत्साह के साथ 15 नबंबर को समाप्त हुआ। अब बुधवार को नतीजे का इंतजार है।

प्रखंड के 13 पंचायतों में वार्ड के लिए 748, पंच सदस्य के लिए 305, मुखिया के लिए 76, सरपंच के लिए 79 पंचायत समिति सदस्य के 103 जिला परिषद पश्चिमी के लिए 13 तथा पूर्वी 8 उम्मीदवार के भाग्य का फैसला होना है।

काफी लंबे समय से अपने पंचायत के जनप्रतिनिधि बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों ने इस बार काफी लंबा चुनाव प्रचार किया।

पहले अप्रैल में पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट ने प्रत्याशी बनने की होड़ में शामिल लोगों ने होली के पहले से ही चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। पंचायत चुनाव का सिलसिला भी काफी लंबा चल रहा है।

चंडी प्रखंड में सातवें चरण में चुनाव था। उम्मीदवारों को कई बार जनता से संपर्क साधना पड़ा। पिछले कई महीने से चुनाव प्रचार में अपनी ताकत झोंक रहे उम्मीदवारों को पता है कि उनकी यह मेहनत ही पांच साल के लिए पंचायत की कुर्सी पर बिठा सकती है।

इसलिए वार्ड से लेकर जिला परिषद उम्मीदवार तक ने अक्तूबर-नबबंर के गुनगुनी धूप में भी खूब पसीने बहाएं, मतदाताओं के सामने मिन्नतें करते रहे, हाथ जोड़ते नजर आए। जैसे कोई छात्र परीक्षा में बैठा हो और वह कुछ न लिखकर वीक्षक से अच्छे नंबर देने की गुहार लगा रहा होता है।

बुधवार की सुबह जब नालंदा कालेज में ईवीएम और बैलेट बॉक्स खुलेंगे  तो यह तय हो जाएगा कि प्रखंड के पंचायतों में मुखिया वहीं रहेंगे या जनता बदलाव के लिए मतदान की थी। जिसका प्रत्याशियों को ही नहीं उनके समर्थकों को ही नहीं बल्कि मतदाताओं को भी रहेगा।

फिलहाल देखना दिलचस्प होगा कि जब मंगलवार का अंधेरा छटेगा और 17 नबंबर की सुबह किसे पंचायत की कुर्सी से बेदखल करती है और किसे पंचायत की सता दिलाती है। किसे हार के अंधेरे में फेंकेगी और किसे जीत की रोशनी नसीब होगी!

 

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