नालंदा दर्पण डेस्क। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पटना निगरानी की विशेष अदालत ने एक अहम फैसले में गिरियक थाना, नालंदा के तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) नरेश प्रसाद और उनके कथित दलाल नरेश सिंह को रिश्वतखोरी के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह फैसला न्यायाधीश मोहम्मद रुस्तम की अदालत ने सुनाया। विशेष लोक अभियोजक रितेश कुमार ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला नालंदा जिले के गिरियक थाना क्षेत्र अंतर्गत पावापुरी निवासी राजकुमार राम की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
अपहरण के मामले में गिरफ्तारी के बदले मांगी थी रिश्वतः शिकायतकर्ता राजकुमार राम ने निगरानी विभाग को दिए आवेदन में बताया था कि उसकी बेटी कोचिंग जाने के दौरान तीन लोगों ने अपहरण कर लिया था। पुलिस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी थी, जबकि दो अन्य फरार थे। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जब वह गिरियक थाने के तत्कालीन एएसआई नरेश प्रसाद से संपर्क में आया तो उससे 10 हजार रुपये की अवैध मांग की गई।
रंगेहाथ पकड़े गए एएसआई और दलालः निगरानी विभाग ने शिकायत की पुष्टि के बाद जाल बिछाया और 14 नवंबर 2009 को घूस लेते हुए एएसआई नरेश प्रसाद तथा उनके दलाल नरेश सिंह को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि एएसआई ने रिश्वत की रकम सीधे न लेकर अपने दलाल के माध्यम से ली थी, जिससे दोनों की संलिप्तता स्पष्ट हो गई।
सात गवाहों की गवाही, आरोप साबितः मुकदमे की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक की ओर से कुल सात गवाहों को अदालत में पेश किया गया। सभी साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
भ्रष्टाचार पर कड़ा संदेशः इस फैसले को पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। न्यायालय के इस निर्णय से यह स्पष्ट है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और घूसखोरी जैसे अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट







