Friday, January 23, 2026
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    हरनौत थाना में दारोगा की आत्महत्या का मामला हुआ पेंचीदा

    बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के हरनौत थाना परिसर में मंगलवार को एक दुखद घटना ने पुलिस महकमे और स्थानीय समुदाय को हिलाकर रख दिया। थाने में तैनात सहायक अवर निरीक्षक (एएसआई) रामपुकार यादव ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली सिर के आर-पार हो गई, जिसके बाद उनकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। इस घटना ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली, कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से उजागर किया है।

    मंगलवार शाम करीब 4:00 बजे हरनौत थाना परिसर में बने शौचालय में 45 वर्षीय रामपुकार यादव ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से सिर में गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर थाने में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में घायल दारोगा को कल्याण बिगहा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। गोली उनके सिर के आर-पार हो गई थी, जिससे उनकी स्थिति शुरू से ही गंभीर थी।

    मृतक रामपुकार यादव गया जिले के परैया इसरपुर थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव निवासी जमुना यादव के पुत्र थे। वे 2024 से नालंदा जिले में तैनात थे और शुरू से ही उनकी ड्यूटी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) के डायल 112 वाहन पर थी।

    घटना के बाद थाने में प्रवेश बंद कर दिया गया और मुख्य गेट को ताला लगा दिया गया। नालंदा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भारत सोनी, सदर डीएसपी-टू संजय कुमार जायसवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचकर जांच में जुट गए।

    रामपुकार यादव की आत्महत्या के पीछे कई संभावित कारण सामने आ रहे हैं, जिनकी पुलिस गहनता से जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार हाल ही में पटना के एक व्यवसायी ने रामपुकार पर ईआरएसएस वाहन के संदर्भ में 15 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था। इस लिखित शिकायत की जांच चल रही थी और इसी दौरान यह घटना घटी। हालांकि रिश्वत के आरोपों का खुलासा अभी तक नहीं हुआ है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह आरोप कितना सत्य था या इसका रामपुकार पर कितना दबाव था।

    पुलिस सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार रामपुकार पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान थे। कुछ सूत्रों ने संकेत दिया कि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था, जिसने उन्हें इस चरम कदम की ओर धकेल दिया।

    राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव ने इस घटना को भ्रष्टाचार और मानसिक प्रताड़ना का परिणाम करार देते हुए नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि रामपुकार को सत्ता के इशारों पर काम करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा हाशिए पर धकेल दिया गया था। यह घटना दर्शाती है कि बिहार में ईमानदार और मेहनती पुलिसकर्मियों के लिए कोई जगह नहीं बची।

    इसके अलावा पुलिस ने यह भी संकेत दिया कि रामपुकार के पारिवारिक तनाव भी इस आत्महत्या का एक कारण हो सकते हैं। हालांकि उनके परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है और यह स्पष्ट नहीं है कि पारिवारिक समस्याएँ क्या थीं। पुलिसकर्मियों पर काम का अत्यधिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य के लिए अपर्याप्त समर्थन और कार्यस्थल पर तनाव जैसी व्यवस्थागत समस्याएँ भी इस घटना के पीछे संभावित कारक मानी जा रही हैं।

    बहरहाल, इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दी है। पुलिस बल के भीतर भी इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी और चिंता देखी जा रही है। पुलिस ने इस मामले की जांच का जिम्मा डीएसपी संजय कुमार जायसवाल को सौंपा है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि रामपुकार ने यह कदम क्यों उठाया।

    क्या रिश्वत के आरोपों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया? क्या वरिष्ठ अधिकारियों की प्रताड़ना या कार्यस्थल का दबाव इसका कारण था? या फिर पारिवारिक तनाव ने उन्हें इस हद तक मजबूर कर दिया?  पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रहे हैं। दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    Mukesh Bhartiyhttps://nalandadarpan.com/
    वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (Mukesh Bhartiy) पिछले 35 वर्षों से समाचार लेखक, संपादक और संचार विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समसामयिक राजनीति, सामाजिक मुद्दों, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय पत्रकारिता पर गहरी पकड़ और विश्लेषणात्मक अनुभव है। वे तथ्य आधारित, निष्पक्ष और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के माध्यम से पाठकों तक ताज़ा खबरें और सटीक जानकारी पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ (Expert Media News) सर्विस द्वारा प्रकाशित-प्रसारित नालंदा दर्पण (Nalanda Darpan) के माध्यम से वे स्थानीय समाचार, राजनीतिक विश्लेषण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं। उनका मानना है कि स्थानीय पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी, प्रमाण और जनहित के साथ सामने रखना है। ताकि एक स्वस्थ समाज और स्वच्छ व्यवस्था की परिकल्पना साकार हो सके।

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