नौवीं की नामांकन में दिक्कत, HM नहीं मान रहे DEO का आदेश

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार शिक्षा विभाग का नामांकन संबंधी एक फरमान से जिले के आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं तथा उनके अभिभावकों को परेशानी में डाल दिया है। यहां सरकारी विद्यालयों में विगत एक अप्रैल से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई है।

इसके पहले ही शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिया गया कि बच्चों को अपने ही पंचायत के माध्यमिक विद्यालयों में नौवीं कक्षा में नामांकन कराना होगा। बच्चों का कक्षाओं की पढ़ाई की सुविधा हो तो उस स्थिति में उन बच्चों को टीसी नहीं दिया जाएगा। बल्कि उन्हें इसी विद्यालय में 9वीं कक्षा में पढ़ाई करनी होगी। इससे जिले के सैंकड़ो छात्र-छात्राओं तथा अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई।

पूर्व में विद्यार्थी मिडिल स्कूल से निकलकर मनचाहे माध्यमिक विद्यालय में नामांकन करा लेते थे। शिक्षा विभाग के इस नए आदेश से छात्र अभिभावक परेशान हो रहे हैं। हालांकि वर्तमान में जिले के सभी 249 पंचायतों में कम से कम एक माध्यमिक विद्यालय अवश्य है।

लेकिन बच्चों के गांव से विद्यालय की अधिक दूरी तथा छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावक वैसे विद्यालयों में नामांकन कराने के पक्ष में नहीं है। इसलिए वे जिला शिक्षा पदाधिकारी से दूसरे विद्यालय में नामांकन कराने के लिए आदेश लेने के लिए चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं।

हर रोज दर्जनों छात्र अभिभावक पहुंच रहे डीईओ कार्यालयः ऐसे दर्जनों छात्र अभिभावक हर रोज अपनी समस्या लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास गुहार लगाने पहुंच रहे हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों का कहना है कि कि उनके गांव के बगल में ही माध्यमिक विद्यालय है तो फिर दो-तीन किलोमीटर दूर के विद्यालय में नामांकन कराने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

उत्क्रमित मध्य विद्यालय नई पोखर रसलपुर की छात्रा राधा कुमारी तथा दिव्या कुमारी ने बताया कि उन्हें माध्यमिक विद्यालय लहुआर से टैग किया गया है, जबकि उनके लिए आरडीएच स्कूल राजगीर में पढ़ाई करना सुविधाजनक है।

इसी प्रकार हिलसा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय राजाबाद के छात्र युवराज कुमार का कहना है कि उन्हें उच्च विद्यालय जैतीपुर से टैग किया गया है, जो काफी दूर है। जबकि रामबाबू हाई स्कूल हिलसा में पढ़ना उनके लिए आसान है।

इसी प्रकार अन्य छात्र, मध्य विद्यालय घोड़ा कटोरा के पिंटू चौधरी, चंडी के प्रशांत कुमार, रामपुर के छात्र नीरज कुमार आदि दर्जनों विद्यार्थियों को मनचाहे विद्यालय में नामांकन नहीं मिल रहा है। जिससे बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी मायूसी देखी जा रही है।

हालांकि आठवीं कक्षा उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं की समस्याओं को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी राज कुमार के द्वारा विभागीय निर्देश पर एक चिट्ठी जारी की गई है। जिसमें प्रधानाध्यापकों को यह निर्देश दिया गया है कि जिन बच्चों को दूर के स्कूल में नामांकन के लिए टैग किया गया है, वैसे बच्चों को पास के माध्यमिक विद्यालय में नामांकन लिया जाए। आदेश की अवहेलना करने वाले प्रधानाध्यापकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी के इस आदेश को भी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक नहीं मान रहे हैं। इससे वाध्य होकर छात्र-छात्राओं तथा उनके अभिभावकों को जिला शिक्षा कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

टैग किए गए स्कूल में क्यों नहीं पढ़ना चाहते छात्र-छात्राएं: शिक्षा विभाग के द्वारा विभिन्न मध्य विद्यालयों को पंचायत के माध्यमिक विद्यालय से टैग कर दिया गया है। विभाग के द्वारा मध्य विद्यालय से माध्यमिक विद्यालय की दूरी का ध्यान नहीं रखा गया है।

इसके अलावा कई छात्र अपने नाते रिश्तेदारों के यहां रहकर भी आठवीं तक की पढ़ाई की है और अब वह अपने गांव में रहकर पढ़ाई करना चाहते हैं। कई छात्राएं गांव से विद्यालय की दूरी अधिक रहने के कारण वहां नामांकन कराना नहीं चाहती हैं तो कई छात्र-अभिभावक बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी मनचाहे विद्यालय में नामांकन कराना चाहते हैं।

ऐसे दर्जनों छात्र हर रोज अपनी फरियाद लेकर जिला शिक्षा कार्यालय आ रहे हैं। कभी-कभी इन्हें अधिकारियों से मुलाकात करने में सुबह से शाम भी हो जाती है।

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