नगरनौसा में आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी घूस लेते रंगे हाथों पकड़ी गई

नगरनौसा (नालंदा दर्पण)। हिलसा अनुमंडल अंतर्गत नगरनौसा प्रखंड में एक बार फिर आंगनवाड़ी विभाग में भ्रष्टाचार की सनसनीखेज घटना सामने आई है। निगरानी टीम ने आंगनवाड़ी केंद्र की पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को ₹3200 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया।
पुलिस उपाधीक्षक शशि शेखर चौधरी के नेतृत्व में सात सदस्यीय विजिलेंस टीम ने नगरनौसा परिसर भवन में इस कार्रवाई को अंजाम दिया। जिसमें पुलिस निरीक्षक विनोद कुमार भी शामिल थे।
शिकायत के अनुसार नगरनौसा कंचन भवन स्थित वन कोड संख्या 28, वार्ड नंबर 3 की आंगनवाड़ी सेविका बेबी कुमारी से पोषाहार पंजी में हस्ताक्षर कराने के बदले 15747 रुपये की राशि का 20% मांगा जा रहा था, जिसके हिसाब से प्रति माह ₹3200 रुपये की नियमित रिश्वत की मांग की जा रही थी। यह घटना विभाग में चल रही व्यवस्थित रिश्वतखोरी का तीसरा ट्रैप बताया जा रहा है।
इस पकड़ के साथ ही ICDS विभाग में गहरी जड़ें जमाए भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण सामने आया है। आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को पोषाहार वितरण, लाभार्थी पंजी, अटेंडेंस और रिपोर्टिंग जैसे कामों में ऊपरी अधिकारियों द्वारा नियमित कटौती की मांग की जाती रही है। छोटी-छोटी रकम में होने वाली यह रिश्वतखोरी जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को लगातार परेशान कर रही है, जिसका सीधा असर पोषाहार योजनाओं के लाभार्थी बच्चों और माताओं पर पड़ता है।
नालंदा जिले में हाल के महीनों में विजिलेंस द्वारा की गई कई ऐसी कार्रवाइयां इस बात की पुष्टि करती हैं कि विभाग में रिश्वत का नेटवर्क काफी संगठित है। भले ही समय-समय पर ट्रैप लगाए जा रहे हों, लेकिन डिजिटल पारदर्शिता, सख्त ऑडिट और नियमित निगरानी की कमी के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
सुषमा कुमारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच चल रही है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का पैसा असल जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सिस्टम में और बड़े सुधार की कितनी जरूरत है।






