नगरनौसा में लगातार तीसरी बार निगरानी को मिली बड़ी कामयाबी, अब महिला पर्यवेक्षिका रंगे हाथ गिरफ्तार
“नगरनौसा में रिश्वतखोरी का यह मामला एक बार फिर यह साबित करती है कि भ्रष्टाचार चाहे छोटी रकम का हो या बड़ा, उसका प्रभाव व्यापक होता है। निगरानी ब्यूरो की सक्रियता से जहां एक ओर दोषियों में भय का माहौल बनेगा, वहीं आम जनता को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है…
नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड से रिश्वतखोरी के खिलाफ एक अहम कार्रवाई सामने आई है, जहां बाल विकास परियोजना कार्यालय में कार्यरत महिला पर्यवेक्षिका सुषमा कुमारी को बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) पटना की टीम ने 3,200 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
यह गिरफ्तारी 6 मई 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 052/26 के तहत की गई, जो 5 मई को दर्ज प्राथमिकी पर आधारित थी। आरोपी को नगरनौसा प्रखंड परिसर स्थित उनके सरकारी आवास से दबोचा गया।
क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता बेबी कुमारी (नगरनौसा निवासी) ने निगरानी ब्यूरो पटना में आरोप लगाया था कि अप्रैल माह के पोषाहार भुगतान से संबंधित पंजी पर हस्ताक्षर करने के लिए उनसे रिश्वत मांगी जा रही है। यह राशि सरकारी योजना के अंतर्गत मिलने वाले पोषाहार से जुड़ी थी, जो सीधे तौर पर आंगनबाड़ी और लाभुकों के अधिकारों से संबंधित है।
ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक शशि शेखर चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।
कार्रवाई और गिरफ्तारीः पूर्व-निर्धारित योजना के तहत निगरानी टीम ने आरोपी को रिश्वत लेते समय पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और जल्द ही उसे विशेष निगरानी न्यायालय, पटना में पेश किया जाएगा।
आंकड़े क्या कहते हैं? निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक यह 52वां मामला दर्ज हुआ है। इनमें से 47 मामले ट्रैप (रंगे हाथ पकड़ने) से जुड़े हैं। अब तक 45 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कुल 17,51,200 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई है।
यह आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है और छोटी रकम के मामलों में भी सख्ती बरती जा रही है।
छोटी रिश्वत, बड़ा असरः यह मामला केवल 3,200 रुपये की रिश्वत का नहीं है, बल्कि यह उस जमीनी स्तर की सच्चाई को उजागर करता है, जहां सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए आम लोगों को भी भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल विकास परियोजनाएं सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों के पोषण से जुड़ी होती हैं। ऐसे में इस स्तर पर भ्रष्टाचार न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि सामाजिक न्याय के खिलाफ भी है।
निगरानी ब्यूरो की अपीलः निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए विभिन्न हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल, व्हाट्सएप और ईमेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।






