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कतरीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नवजात की मौत पर उठे सवाल

कतरीसराय (नालंदा दर्पण)। कतरीसराय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आठ बेड वाले इस अस्पताल में केवल दो चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने के कारण इलाज व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। नवजात की मौत को लेकर परिजनों ने अस्पताल कर्मियों की लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने इसे चिकित्सकीय जटिलता बताते हुए आरोपों से इनकार किया है।

जानकारी के अनुसार बिलारी गांव निवासी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार सुबह उनकी 23 वर्षीय परिजन रिमझिम कुमारी को प्रसव पीड़ा होने पर कतरीसराय पीएचसी लाया गया। उनका आरोप है कि उस समय चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे और एएनएम ने सामान्य प्रसव कराया। सुबह करीब सात बजे रिमझिम ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, जिसका वजन लगभग तीन किलोग्राम बताया गया।

परिजनों का कहना है कि जन्म के करीब तीन घंटे बाद नवजात की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे तत्काल बेहतर इलाज के लिए पावापुरी स्थित विम्स रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश व्याप्त है। उनका आरोप है कि समय पर चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलने और स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण नवजात की जान चली गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पिंकी वर्णवाल ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पीएचसी में सुरक्षित सामान्य प्रसव कराया गया था। उन्होंने बताया कि वह अवकाश पर थीं, जबकि दूसरे चिकित्सक ड्यूटी पर मौजूद थे। उनके अनुसार नवजात की तबीयत दूध पिलाने या अन्य चिकित्सकीय कारणों से भी बिगड़ सकती है। चूंकि पीएचसी में शिशु रोग विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए नवजात को तत्काल बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।

डॉ. वर्णवाल ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। वर्तमान में केवल दो चिकित्सक कार्यरत हैं, जिसके कारण एक चिकित्सक के अवकाश पर रहने की स्थिति में दूसरे चिकित्सक को लगातार 36 से 72 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

फिलहाल नवजात की मौत को लेकर परिजनों और अस्पताल प्रशासन के दावों में स्पष्ट विरोधाभास है। एक पक्ष जहां इसे स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही बता रहा है, वहीं अस्पताल प्रशासन इसे चिकित्सकीय जटिलता का मामला मान रहा है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं आधिकारिक जांच के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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