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बिहारशरीफ में APK से मोबाइल हैक कर 11 लाख की ठगी, साइबर थाना ने दो अपराधियों को दबोचा

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क पर नकेल कसते हुए साइबर थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने करीब 11 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए दो शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। ये अपराधी व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को झांसे में लेकर APK फाइल भेजते थे और मोबाइल हैक कर उनके बैंक खातों से रकम उड़ा लेते थे।

यह कार्रवाई साइबर उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष राधवेन्द्र मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम द्वारा गुप्त सूचना के आधार पर की गई। पुलिस ने दोनों आरोपियों को नालंदा कॉलोनी स्थित उनके अस्थायी ठिकाने से दबोच लिया।

आसान लोन के नाम पर रचते थे ठगी का जालः पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी मनोज कुमार उर्फ रंजीत कुमार (27 वर्ष) और पंकज कुमार (19 वर्ष) दोनों सरवहदी (थाना- मानपुर) के निवासी हैं। ये अपराधी लोगों को आसान और त्वरित लोन दिलाने का लालच देते थे। इसके लिए वे व्हाट्सऐप के माध्यम से एक APK फाइल भेजते थे।

जैसे ही कोई व्यक्ति इस फाइल को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करता, उसका मोबाइल पूरी तरह अपराधियों के नियंत्रण में आ जाता। इसके बाद आरोपी मोबाइल डेटा एक्सेस कर लेते थे। यूपीआई और बैंकिंग ऐप की जानकारी हासिल कर लेते थे।

मोबाइल नंबर और ओटीपी पर नियंत्रण प्राप्त कर लेते थे और फिर बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। इस तरह उन्होंने कई लोगों को निशाना बनाकर करीब 11 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बार-बार बदलते थे ठिकानाः साइबर थाना पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते थे। हाल ही में वे अपनी पहचान छुपाकर नालंदा कॉलोनी में किराए के मकान में रह रहे थे। पुलिस ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

ठगी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामदः पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और उपकरण बरामद किए हैं। जिनमें 09 मोबाइल फोन (07 स्मार्टफोन और 02 कीपैड मोबाइल), 05 एटीएम कार्ड, 06 जाली आधार कार्ड, 01 पैन कार्ड, 01 नोटशीट (संभावित पीड़ितों के मोबाइल नंबर) शामिल हैं।

इन बरामद सामग्रियों से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

तकनीकी जांच से मिली सफलताः साइबर थाना पुलिस ने बताया कि इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल डेटा की तकनीकी जांच अहम साबित हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और किन-किन लोगों को निशाना बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के नेटवर्क का विस्तार अन्य जिलों और राज्यों तक भी हो सकता है।

साइबर पुलिस की आम जनता से अपीलः साइबर थाना पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल डाउनलोड न करें। अनजान लिंक या लोन ऑफर से सावधान रहें। बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

बढ़ते साइबर अपराध पर पुलिस की सख्तीः इस कार्रवाई से यह साफ संकेत मिला है कि नालंदा पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

साइबर थाना पुलिस की इस सफलता से आम लोगों में विश्वास बढ़ा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई से साइबर अपराध पर प्रभावी रोक लगेगी।

स्रोत: नालंदा दर्पण डेस्क / तालिब

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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