Home प्रशासन DEO का कड़ा आदेश: अब शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाने पर सख्त...

DEO का कड़ा आदेश: अब शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाने पर सख्त रोक

DEO's strict order Now there is a strict ban on getting teachers to do non-educational work
DEO's strict order Now there is a strict ban on getting teachers to do non-educational work

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले के शिक्षा विभाग में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) आनंद विजय ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने का सख्त आदेश जारी किया है।

इस संबंध में सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों से किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं करवाया जाए। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और शिक्षकों को उनके मूल कर्तव्यों पठन-पाठन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उठाया गया है।

DEO आनंद विजय ने अपने पत्र में कहा कि ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि जिले के विभिन्न शिक्षा विभागीय शाखाओं और प्रखंड स्तरीय कार्यालयों में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाए जा रहे हैं। यह न केवल कार्यालय कार्य संस्कृति के खिलाफ है, बल्कि विभागीय निर्देशों की घोर अवहेलना भी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी कार्यालयी कार्य, जैसे लिपिकीय कार्य, डाटा एंट्री या अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ, केवल कर्मचारियों, लिपिकों, लेखा सहायकों या डाटा एंट्री ऑपरेटरों के माध्यम से ही करवाए जाएँ।

आदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि जांच के दौरान किसी भी कार्यालय में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाया जाता पाया गया तो संबंधित पदाधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

DEO ने इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर डालते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी स्वयं जवाबदेह होंगे।

नालंदा जिले के विभिन्न प्रखंड शिक्षा कार्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों को लिपिकीय और प्रशासनिक कार्यों में लगाया जाता रहा है। कई शिक्षक विद्यालयों में पढ़ाने के बजाय अधिकारियों के कार्यालयों या उनके आवास पर विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं। कुछ शिक्षक तो अन्य शिक्षकों के लिए भी कार्यालयी कार्यों का निष्पादन करते हैं, जिससे स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई प्रभावित होती है।

स्थानीय शिक्षक संघ के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार शिक्षकों को मजबूरी में ये कार्य करने पड़ते हैं, क्योंकि अधिकारियों का दबाव होता है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।

हालांकि, कुछ शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के आदेश पहले भी जारी हुए हैं, लेकिन उनका पालन कुछ ही समय तक होता है।

क्योंकि यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह का आदेश जारी किया गया है। पूर्व में भी जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने के निर्देश दिए थे। शुरुआत में इनका कुछ असर दिखा, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति फिर पुरानी हो गई। कई शिक्षक फिर से कार्यालयी कार्यों में जुट गए।

इस बार DEO ने सख्ती दिखाते हुए अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार आदेश का पालन अधिक प्रभावी ढंग से होगा।

इस आदेश का अभिभावकों ने भी स्वागत किया है। एक अभिभावक ने कहा कि शिक्षकों का काम बच्चों को पढ़ाना है, न कि फाइलें संभालना। अगर शिक्षक कक्षा में रहेंगे तो हमारे बच्चों का भविष्य सुधरेगा।

वहीं, कुछ शिक्षकों ने इस आदेश को एक सकारात्मक कदम बताया कि लेकिन साथ ही यह भी चिंता जताई कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है जब प्रशासनिक स्तर पर भी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बहरहाल, यह आदेश नालंदा जिले के शिक्षा तंत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, बशर्ते इसका सख्ती से पालन हो। शिक्षकों को उनके मूल कार्य शिक्षण पर ध्यान देने का मौका मिलेगा, जिससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधर सकता है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अधिकारी इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करते हैं और क्या शिक्षकों को अनावश्यक दबाव से मुक्त रखा जा सकेगा।

नालंदा दर्पण इस मुद्दे पर नजर रखेगा और यह देखेगा कि यह आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है। क्या यह आदेश शिक्षा विभाग में एक नई कार्य संस्कृति की शुरुआत करेगा या यह भी पहले की तरह केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा? यह समय ही बताएगा।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!
Exit mobile version