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      मंत्री-अफसर की हिदायत के बाबजूद शिक्षण संस्थान वसूल रहे मनमाना शुल्क, विभाग बना अंधा

      चंडी (नालंदा दर्पण )। क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना का उद्देश्य कभी शिक्षा देना था। लेकिन आज चंडी प्रखंड में शिक्षा मनी(मणि)पाल बना हुआ है। प्रखंड में कुल दो डिग्री कॉलेज है।

      rigged in Magadha college election roll format principals name added professor removed 2इंटर कॉलेज के साथ अतिरिक्त निबंधित माध्यमिक विद्यालयों जिनकी संख्या डेढ़ दर्जन के करीब है। इन कालेजों और विद्यालयों में इंटर का परीक्षा प्रपत्र भरा जा रहा है। लेकिन शुल्क में एकरूपता नहीं दिख रही है।

      कालेज कुछ वसूल रहें हैं। माध्यमिक विद्यालय कुछ और निजी स्कूल कुछ और। डिग्री कालेज में इंटर के विधार्थियों से 4300 रूपए वसूले वहीं चंडी बापू हाईस्कूल में सामान्य वर्ग से 2785, अनुसूचित जाति के लिए 2535 रूपये लिए गए।

      जबकि सबकी परीक्षाएं बिहार विधालय परीक्षा समिति ही लेती है। डिग्री कालेज ने 1515 रूपये प्रत्येक छात्र से अधिक राशि वसूली। जबकि डिग्री कॉलेज में दो साल में एक दिन भी कक्षा संचालन नहीं हुआ, शिक्षण कार्य नहीं हुआ। ऐसी स्थिति में शिक्षण शुल्क वसूलने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है।

      यहां तक कि ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी जिले में मनमाने शुल्क को लेकर नाराजगी दिखा चुके हैं। उन्होंने शिक्षा पदाधिकारी को लिखा भी है कि निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूली करने वाले प्रधानाचार्यो पर कार्रवाई की जाएं।

      नवादा जिले में एक प्रधानाचार्य को छात्रों से 20 रूपए ज्यादा लिए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। जबकि नालंदा के चंडी प्रखंडों में ऐसे कई उदाहरण है।

      क्षेत्र में महामारी के प्रकोप से आम लोगों की आर्थिक स्थिति योही खस्ता है। बाबजूद लोग भ्रष्ट तरीके अपना कर छात्रों और अभिभावकों का दोहन करने पर तुले हुए हैं।

      यहां तक कि निजी स्कूलों की भी मनमानी चरम पर है। संचालक यदा-कदा बैठक कर सभी विधार्थियों से एक हजार से ज्यादा वार्षिक शुल्क, हजारों लैब, कम्प्यूटर, जेनरेटर आदि के नाम पर लूट रहे है।

      देखा जाएं तो साल का अतिरिक्त शुल्क दो से ढाई हजार प्रति छात्र वसूली हो रही है। इसके अतिरिक्त नामांकन के समय तीन हजार से छह हजार,किताब बिक्री पर 25-30प्रतिशत कहीं गणवेश पर 10-20 प्रतिशत कमीशन उगाही की जा रही है।

      इनके इस काले कारनामे पर शिक्षा विभाग आंख बंद किये हुए है। आखिर संस्था के माध्यम से विधालय चलाने का क्या मतलब है, जब इनपर किसी का नियंत्रण न हो।

       

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