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दो दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं से महरुम है हिलसा रेलवे स्टेशन !

हिलसा (नालंदा दर्पण)। फतुहा-इस्लामपुर रेलखंड का निर्माण हुए लगभग दो दशक से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन इस हिलसा रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। इस क्षेत्र के निवासियों के लिए रेल यात्रा किसी चुनौती से कम नहीं है। रेलवे की उदासीनता और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने यात्रियों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है।

बता दें कि हिलसा से पटना जाने के लिए सुबह 7 बजे के बाद अगली ट्रेन शाम 4 बजे मगध एक्सप्रेस के रूप में उपलब्ध है। वहीं, पटना से इस्लामपुर जाने के लिए दोपहर 12:45 बजे के बाद सीधे रात 8:30 बजे ही पैसेंजर ट्रेन मिलती है। इस असुविधाजनक समय-सारणी के कारण यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पटना से इस्लामपुर के लिए शाम 6:00 से 7:00 बजे के बीच एक अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेन और सुबह 10:00 से 11:00 बजे के बीच एक और ट्रेन चलाई जाए, ताकि यात्रा सुगम हो सके।

हिलसा स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बेहद कम होने के कारण ट्रेन पर चढ़ना और उतरना एक जोखिम भरा काम बन गया है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक है। आए दिन पैर फिसलने से यात्री गिरकर चोटिल हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्टेशन पर ओवरब्रिज न होने के कारण हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। कई बार ट्रेनें ट्रैक पर घंटों खड़ी रहती हैं, जिससे मजबूरन लोग ट्रेन के नीचे से ट्रैक पार करने को विवश होते हैं। यह न केवल खतरनाक है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकता है। यात्रियों का कहना है कि एक ओवरब्रिज इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है, लेकिन रेलवे प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।

हिलसा स्टेशन पर शौचालय की व्यवस्था न के बराबर है। जो एकमात्र शौचालय उपलब्ध है, वह भी रेलवे कर्मचारियों की लापरवाही के चलते गंदगी से भरा पड़ा है। यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों को इस वजह से भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्टेशन पर स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए रोजमर्रा की मुसीबत बन गई है।

इस रेलखंड पर सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से शिकायत करते आ रहे हैं। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने, प्लेटफॉर्म की ऊंचाई सुधारने, ओवरब्रिज निर्माण और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था करने की मांग जोर पकड़ती रही है। लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं दिखाई है। यात्रियों का कहना है कि अगर जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

 

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