
सिलाव (नालंदा दर्पण)। राजगीर को बौद्ध सर्किट मार्ग से जोड़ने के लिए प्रस्तावित 4लेन सड़क निर्माण कार्य को लेकर सिलाव के किसानों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कार्य रोक दिया है।
किसानों का आरोप है कि सरकार ने अभी तक उनकी भूमि का अवार्ड नहीं दिया और मुआवजा राशि को लेकर गंभीर भेदभाव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि बेहद कम मुआवजा राशि निर्धारित की गई है और भूमि अधिग्रहण के दौरान उन्हें उचित मूल्य नहीं दिया जा रहा।
सिलाव नगर क्षेत्र मौजा की भूमि पर 4-लेन हाईवे का निर्माण प्रस्तावित है, जो पटना से राजगीर की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक है। लेकिन इस परियोजना में किसानों का मुआवजा बिल्कुल उचित नहीं है, इसे लेकर वे आक्रोशित हैं।
किसानों ने बताया कि 2018 में नूरसराय राजगीर पथ के लिए इसी भूमि का अधिग्रहण हुआ था, तब उन्हें 3 लाख 59 हजार रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा दिया गया था। अब सात साल बाद, केवल 82 हजार रुपये प्रति डिसमिल मुआवजा प्रस्तावित किया गया है, जो किसानों के अनुसार उनकी भूमि का वास्तविक मूल्य नहीं दर्शाता है।
किसानों का कहना है कि यदि मुआवजा की राशि में उचित संशोधन नहीं किया जाता तो वे किसी भी हालत में निर्माण कार्य को आगे बढ़ने नहीं देंगे। इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और संवेदक को भी मौके पर पहुंचना पड़ा।
इस मामले में जिला भूअर्जन पदाधिकारी का कहना है कि वे इस मामले में बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं और पुलिस फोर्स के साथ कार्य को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है।
हालांकि किसानों ने कड़े शब्दों में कहा है कि अगर बिना मुआवजा दिए पुलिस का सहारा लिया गया तो वे आत्महत्या करने जैसी कार्रवाई को भी करने को मजबूर होंगे।
किसानों का कहना है कि जब तक मुआवजा राशि ठीक से निर्धारित नहीं की जाती, वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक विरोध जारी रखेंगे।










