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खत्म होती फागुनी राग की परपंपरा के बीच अश्लील गानों का बढ़ता प्रचलन

बेन (नालंदा दर्पण)। इन दिनों बेन प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश बाजारों, डीजे एवं सवारी गाड़ियों में बेरोकटोक कानफोड़ू आवाज में फुहड़ व अश्लील गानों का बजना शुरू हो गया है। जिसके कारण परिवार के साथ महिलाओं व युवतियों को यात्रा के क्रम में इन गानों के बजने पर असहज महसूस करते हैं।

सभ्य महिलाओं व छात्राओं की आंखें शर्म से झुक जाती है। खासकर अभी शादी ब्याह व होली को लेकर हरेक गली मुहल्लों व वाहनों में अश्लील व दो अर्थी गानों का प्रचलन जोरो पर है। जिसमें बेहद हीं फुहड़ व अश्लील गानें बेरोकटोक बजाए जा रहे हैं।

नाम न उजागर करने की बात पर कई छात्राओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चौक-चौराहों, वाहनों में बज रहे अश्लील गानों के कारण स्कूल व कोचिंग आते-जाते वक्त भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।

लफंगे टाईप के लड़के व लफंगे किस्म के लोग अश्लील गानों की बोल के आड़ में भद्दे भद्दे कमेंट देते हैं, जिससे फजीहत झेलनी पड़ती है। बुद्धिजीवी व सभ्य वर्ग के महिलाओं, छात्राओं ने कहा कि वाहनों एवं चौक चौराहों पर बजने वाले अश्लील गानों पर प्रशासन को रोक लगानी चाहिए।

खत्म होती जा रही फागुन गानों की परंपरा: इस तरह के गानों से जहाँ अश्लीलता परोसने की प्रतियोगिता लगी हुई है, वहीं इसके कारण पारंपरिक होली की परंपरा भी खत्म होती जा रही है।

सबसे आश्चर्य बात तो यह भी है कि ऐसे गानों पर प्रतिबंध के बाबजूद फुहड़ व अश्लील गानें धड़ल्ले से बजाए जा रहे हैं। जिसके कारण फाग गाने की परंपरा का भी अंत होता जा रहा है। नई पीढ़ी अश्लीलता में डूबती जा रही है। वहीं दूसरी ओर ऐसे गानों की बजह से छेड़छाड़ की घटना भी बढ़ती जा रही है।

मुकेश भारतीय

मुकेश भारतीय वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजनीति, प्रशासन और स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर लेखन-संपादन करते हैं। More »
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