बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग ने राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्र की पहचान को एक समान और आकर्षक बनाने के लिए एक अहम पहल की है। अब पूरे बिहार के एक लाख 14 हजार आंगनबाड़ी केंद्र एक ही रंग में रंगे जाएंगे। ताकि उन्हें दूर से आसानी से पहचाना जा सके। साथ ही इन केंद्रों की दीवारों पर शैक्षणिक चित्र भी बनाए जाएंगे, जिससे बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई कर सकें और सीखने की प्रक्रिया में रुचि लें।
वर्तमान में राज्यभर के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति ऐसी है कि आम जनता को उनकी पहचान करने में कठिनाई होती है। इनमें से करीब 80 हजार केंद्र किराए के मकानों में संचालित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त चार हजार नए केंद्रों के प्रस्ताव भी विभाग के पास लंबित हैं।
समाज कल्याण विभाग ने इस नई योजना के तहत निर्देश जारी किए हैं कि प्रत्येक केंद्र को एक विशिष्ट रंग में रंगा जाएगा। यह रंग ऐसा होगा, जो बच्चों के मन को भाए और उन्हें केंद्र की ओर आकर्षित करे। रंगों का चुनाव करने के लिए मनोचिकित्सकों की मदद ली जा रही है। ताकि रंगों का बच्चों के मनोविज्ञान पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।
यह पहल गर्मी के मौसम के बाद जमीन पर उतारी जाएगी। रंगाई के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों की दीवारों पर शैक्षणिक और मनोरंजक चित्र बनाए जाएंगे। जैसे- अक्षर, संख्याएं, फल-फूल, जानवर, नैतिक कहानियों से जुड़े दृश्य आदि।
इसके अलावा विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक केंद्र के मुख्य द्वार पर केंद्र का नाम, सेविका और सहायिका का नाम स्पष्ट रूप से लिखा हो। ऐसा नहीं करने पर संबंधित संचालिका और निरीक्षणकर्ता एलएस के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
समाज कल्याण विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के केंद्रों की भौतिक स्थिति का मूल्यांकन करें- चाहे वे स्वामित्व वाले भवन में हों, स्कूल परिसर में हों या किराए के मकान में। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चाहे केंद्र कहीं भी हो, उसकी पहचान एक जैसी रंग-रूप से हो और वह बच्चों के अनुकूल दिखाई दे।








