सीएम सम्राट चौधरी के हाथों राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026 का भव्य आगाज

राजगीर/मुकेश भारतीय। सनातन आस्था, अध्यात्म और प्राचीन परंपराओं के अद्भुत संगम माने जाने वाले विश्व प्रसिद्ध राजकीय राजगीर मलमास मेला 2026 का रविवार को भव्य शुभारंभ हो गया। पावन नगरी राजगीर में आयोजित इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच फीता काटकर किया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद राजगीर की पावन धरती पर यह उनका पहला दौरा रहा। इसे लेकर पूरा मेला क्षेत्र हाई अलर्ट पर रहा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उद्घाटन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ब्रह्मकुंड परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने पवित्र कुंडों का निरीक्षण किया तथा देवी-देवताओं का आवाहन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
इसके बाद वे भव्य महाआरती कार्यक्रम में शामिल हुए। शंखनाद और वैदिक मंत्रों के बीच शुरू हुई आरती के दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिमास यानी पुरुषोत्तम मास के दौरान 33 कोटि देवी-देवता स्वर्ग छोड़कर राजगीर में निवास करते हैं। वायु पुराण में उल्लेख है कि इस अवधि में राजगीर के पवित्र कुंडों में स्नान करने से वर्षभर गंगा स्नान के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस मेले में पहुंचते हैं।
17 मई से 15 जून 2026 तक चलने वाले इस महीने भर के महापर्व में इस बार 4 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और आधुनिक ड्रोन के माध्यम से की जा रही है। वहीं कल्पवासियों के लिए अत्याधुनिक वाटरप्रूफ जर्मन टेंट सिटी भी तैयार की गई है।
मलमास मेले की सबसे बड़ी आस्था राजगीर के 22 पवित्र कुंडों और 52 जलधाराओं में होने वाले शाही स्नान को लेकर है। इस वर्ष चार प्रमुख शाही स्नान आयोजित किए जाएंगे। पहला शाही स्नान 27 मई को एकादशी, दूसरा 31 मई को पूर्णिमा, तीसरा 11 जून को एकादशी तथा चौथा एवं अंतिम शाही स्नान 15 जून को अमावस्या के दिन होगा।
साधु-संतों की टोलियों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक में इस महापर्व को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक झूले और मगध की लोक संस्कृति से सजा यह मेला अगले एक महीने तक बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की भव्य झलक दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।






