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वैतरणी और सरस्वती नदी में ट्रैक्टर से गिराया जा रहा बालू! नजारा देख भड़के लोग- ये कैसा विकास?

राजगीर (नालंदा दर्पण)। विश्व प्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला शुरू होने से ठीक पहले पर्यटन नगरी राजगीर में वैतरणी और सरस्वती नदी में बालू डाले जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यह कार्य कराया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यावरण को लेकर चिंतित नागरिकों ने इस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार सरस्वती नदी कुंड में स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को कीचड़ और फिसलन से बचाने के लिए पहले पीसीसी निर्माण कराया गया था। अब कुंड के आधार तल पर ग्रेबुल की जगह बालू डालने का काम तेजी से चल रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं को स्नान में आसानी होगी और कीचड़ की समस्या कम होगी।

हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी या कुंड के तल में बालू डालना स्थायी और वैज्ञानिक समाधान नहीं है। उनका तर्क है कि ग्रेबुल का इस्तेमाल अधिक टिकाऊ होता है और इससे पानी का प्राकृतिक बहाव भी प्रभावित नहीं होता।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बालू की जगह ग्रेबुल का उपयोग किया जाए, ताकि नदी की स्वच्छता और प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रह सके।

मलमास मेला के दौरान राजगीर में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वैतरणी नदी में स्नान और गाय की पूंछ पकड़कर भवसागर पार करने की परंपरा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा यहां पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वैतरणी और सरस्वती नदी की वर्तमान स्थिति काफी खराब हो चुकी है। दोनों नदियां गाद, कीचड़ और गंदगी से भरी हुई हैं और कई स्थानों पर पानी भी नहीं है। लोगों का कहना है कि वास्तविक सफाई और गाद निकासी की जगह प्रशासन बालू डालकर स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रहा है।

नदी घाटों के आसपास ट्रैक्टरों से लगातार बालू गिराए जाने का दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जहां पूरे प्रदेश में अवैध बालू खनन और निकासी के मामले सामने आते रहे हैं, वहीं राजगीर में नदियों में ही बालू डाले जाने का यह अनोखा मामला प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन स्थानीय लोगों की मांग पर विचार कर नदी संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में क्या कदम उठाता है।

Nalanda Darpan

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय (mukesh bhartiy) पिछले तीन दशक से राजनीति, अर्थ, अधिकार, प्रशासन, पर्यावरण, पर्यटन, धरोहर, खेल, मीडिया, कला, संस्कृति, मनोरंजन, रोजगार, सरकार आदि को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बतौर कंटेंट राइटर-एडिटर सक्रिय हैं।

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